ठेकेदार को लाभ पहुंचाने बड़ी गड़बड़ी की आशंका
भिलाई। स्वच्छ भारत मिशन पीएम नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना कचरे से खाद बनाने के लिए बड़ी गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया है। आशंका जताई जारही है कि ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए पूरा खेल खेला गया है। जिसकी वजह से नगर निगम को बड़ी हानि हुई है। जबकि चौकाने वाली बात यह है कि कचरे से खाद बनाने के लिए निगम ने ठेकेदार को 5.77 करोड़ रुपए में ठेका दिया था, उसी काम को शासन के आदेश पर अब निगम ने ही 2.66 करोड़ में दिया है। मतलब निगम ठेकेदार को 3.15 करोड़ रुपए ज्यादा पेमेंट किया है।
सेग्रीगेशन प्लांट में कचरे से खाद बनाने के लिए ठेका किया गया। तब ठेकेदार को लाभ पहुंचाने एक ओर जहां 29.50 लाख रुपए अधिक रेट में ठेका दिया गया। वहीं दूसरी ओर खाद के एवज में ठेकेदार से निगम जो राशि कटौती करता है, उस राशि को 9.27 लाख कम कर दिया गया है। इस प्रकार ठेकेदार को 38.77 लाख रुपए वार्षिक लाभ पहुंचा गया और निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज के आधार पर नगर निगम भिलाई के पास शहर में 9 एसएलआरएम सेंटर है। जिसका पहला टेंडर 2 फरवरी 2023 को जारी किया गया। टेंडर में किसी एजेंसी ने भाग नहीं लिया। तब रि-टेंडर 17 फरवरी 2023 को किया गया। जिसमें मे.अर्बन एनवायरो वेस्ट मैनेजमेंट नागपुर और मे. शम्भू सिंह कन्ट्रक्शन सेक्टर 2 ने टेंडर भरा। तकनीकी समिति ने मे. शम्भू सिंह कन्ट्रक्शन का दस्तावेज कम होना बनाकर टेंडर से बाहर कर दिया। तो सिर्फ मे.अर्बन एनवायरो वेस्ट मैनेजमेंट नागपुर ही बचा। जिसे ठेका दे दिया गया।
रेट निगोशिएशन किए और मात्र 15 रुपए घटाए
मे.अर्बन एनवायरो वेस्ट मैनेजमेंट नागपुर ने ऑनलाइन रेट 1130 रुपए प्रति टन भरा था। वार्षिक दर 10.84 करोड़ रुपए था। खाद के लाभांश के रूप में 9.76 लाख रुपए कटौती के बाद 98.71 लाख रुपए ठेकेदार को दिया गया। जो कि 29.50 लाख रुपए निविदा राशि से ज्यादा था। इसलिए 21 मार्च 2023 को एमआईसी के प्रस्ताव क्रमांक 17 निगोशिएशन के प्रस्ताव को सर्व सम्मति से पास किया गया। और फिर ठेका एजेंसी के दर में मात्र 15 रुपए कम किए। ठेकेदार का रेट 1130 रुपए प्रति टन को कम कर 1115 रुपए के हिसाब से वर्क आर्डर दे दिया गया।
जानिए हम क्यों कह रहे गड़बड़ी हुई ….
1 ज्यादा रेट में में ठेका दिया
निगम प्रशासन ने मे.अर्बन एनवायरो वेस्ट को 1115 रुपए प्रति टन की दर से ठेका दिया। जबकि इसी काम को इससे पहले मे. रमन ठेकेदार 721 रुपए प्रति टन के दर से करना था। सीधे-सीधे नागपुर की एजेंसी को 394 रुपए प्रति टन अधिक रेट में ठेका दिया गया। 1.07 करोड़ रुपए वार्षिक मूल्य पर ठेका दिया गया। इसमें खाद के लाभांश के रूप में 9.76 लाख रुपए वार्षिक कटौती करने के बाद 98.71 लाख रुपए ठेकेदार को दिया गया। जबकि यही काम रमन ठेकेदार 69.21 लाख रुपए में करता था। मतलब नागपुर की एजेंसी को 29.50 लाख रुपए ज्यादा में ठेका दिया गया।
- लाभांत की राशि में कटौती की गई
नगर निगम इसी काम को पहले जब रमन ठेकेदार काम कर रहा था तब वित्तीय वर्ष में खाद के रूप में मिलने वाला लाभांश की राशि 2200 रुपए प्रति टन था। इस हिसाब से 2200 X 72 टन X 12 माह = 1900800 रुपए प्रतिवर्ष ठेकेदार के पेमेंट से निगम काटता था। जबकि नागपुर की कंपनी को 1130 रुपए प्रति टन लिया गया। मतलब 1130 X 72 टन X 12 माह = 976320 रुपए प्रति वर्ष लिया गया। अर्थात 927480 रुपए प्रति वर्ष ठेकेदार से कम राशि लेकर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।




