Tuesday, April 21, 2026

आधुनिक खेती के संग एग्रो टूरिज्म का अनोखा संगम: दुर्ग जिले का प्रेरणादायक मॉडल”

“कृषि पत्रकारिता एवं व्यवहार कौशल” के तहत शैक्षणिक भ्रमण

दुर्ग। जिले के धमधा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम गोढ़ी में एग्रो टूरिज्म और आधुनिक खेती का एक अनोखा एवं प्रेरणादायक मॉडल विकसित हुआ है, जो ग्रामीण विकास की नई दिशा तय कर रहा है। यहां कृषि और पर्यटन का ऐसा समन्वय देखने को मिलता है, जो किसानों के लिए आय के नए स्रोत और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित कर रहा है।

छत्तीसगढ़ कृषि महाविद्यालय, धनोरा के अंतिम वर्ष के छात्र पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह ने “कृषि पत्रकारिता एवं व्यवहार कौशल” विषय के प्रायोगिक अध्ययन के अंतर्गत इस फार्म का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने फार्म संचालक प्रगतिशील किसान हितेश वरू से मुलाकात कर आधुनिक खेती की तकनीकों और प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
हितेश वरू ने बताया कि उन्होंने अपनी खेती की शुरुआत मात्र 5 एकड़ भूमि से की थी। निरंतर मेहनत, नवाचार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से आज उनका फार्म लगभग 150 एकड़ तक विस्तारित हो चुका है, जो उनकी दूरदर्शिता और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इस एग्रो टूरिज्म केंद्र में पर्यटकों के लिए मड बाथ (मृदा स्नान), ट्रैक्टर राइड, वाटर पार्क, स्विमिंग पूल एवं विभिन्न एडवेंचर गतिविधियों जैसी आकर्षक सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही, आगंतुकों को सब्जी तुड़ाई एवं खेती के कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभव भी कराया जाता है, जिससे वे ग्रामीण जीवन और कृषि प्रणाली को नजदीक से समझ पाते हैं। फार्म में मौसमी सब्जियों के साथ-साथ अमरूद का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है, जो किसानों के लिए आय का एक मजबूत स्रोत बनकर उभरा है।

इस मॉडल के माध्यम से न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। शहरों से आने वाले लोग यहां प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने के साथ-साथ खेती और ग्रामीण जीवन से जुड़ी नई जानकारियां प्राप्त कर रहे हैं। विशेष रूप से बच्चों के लिए यह स्थान एक “एजुकेशनल हब” के रूप में विकसित हो रहा है, जहां वे प्रकृति, खेती और ग्रामीण संस्कृति का व्यावहारिक ज्ञान हासिल कर रहे हैं।
यह पहल आधुनिक कृषि और पर्यटन के सफल समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो आने वाले समय में अन्य किसानों और उद्यमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।

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