Thursday, April 16, 2026

धर्म रक्षा का विराट शंखनाद: ‘चतुर्भुज’ बनने का आह्वान, आचार्य डॉ. अजय आर्य का जोशीला उद्बोधन

धर्मांतरण पर कड़ा प्रहार, युवाओं को शक्ति-भक्ति के मार्ग पर चलने का दिया संदेश

भिलाई – दुर्ग आर्य समाज के तत्वावधान में आर्य समाज स्थापना के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित जन-जागृति अभियान, 151 कुंडीय राष्ट्र रक्षा महायज्ञ एवं विराट आर्य महासम्मेलन के अंतर्गत धर्म रक्षा सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए सुप्रसिद्ध युवा वैदिक विद्वान आचार्य डॉ. अजय आर्य ने ओजस्वी उद्बोधन दिया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश और धर्म की रक्षा के लिए प्रत्येक व्यक्ति को ‘चतुर्भुज’ बनना होगा। ‘चतुर्भुज’ की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि अब केवल दो भुजाओं से कार्य नहीं चलेगा, बल्कि दुगुनी ऊर्जा, दुगुना परिश्रम और पूर्ण समर्पण के साथ आगे आना होगा।

धर्मांतरण को देश की एकता और अखंडता के लिए घातक बताते हुए उन्होंने समाज को सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारे देवी-देवताओं के हाथों में अस्त्र-शस्त्र केवल प्रतीक नहीं, बल्कि शक्ति और सजगता के संदेश हैं।

युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज का युवा सिक्स पैक के आकर्षण में उलझ रहा है, जबकि उसका वास्तविक आदर्श पराक्रमी चरित्र हनुमान, भीम और बजरंगबली होने चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शक्ति, भक्ति और समर्पण के मार्ग पर चलते हुए देश और धर्म की आन-बान-शान के लिए सदैव तत्पर रहें।

शंख, चक्र, पद्म और गदा की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि शंख आवाज का प्रतीक है—जो समाज अपनी आवाज बुलंद करना नहीं जानता, वह समाप्त हो जाता है। चक्र गति का प्रतीक है—जो गतिशील रहेगा वही सुरक्षित रहेगा। पद्म समृद्धि का प्रतीक है—यह केवल धन नहीं, बल्कि विचारों की समृद्धि का भी प्रतीक है। गदा शक्ति का प्रतीक है—निर्बल व्यक्ति न तो स्वयं की रक्षा कर सकता है और न ही धर्म की।

उन्होंने कहा कि भारत ऋषियों का देश है, जिसने संपूर्ण विश्व को ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश दिया है, किंतु इसके साथ ही आत्मबल, संगठन और जागरूकता भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देते हुए कहा कि सच्चा ‘नशा’ शक्ति, भक्ति और राष्ट्रसेवा का होना चाहिए।
आचार्य डॉ. अजय आर्य के ओजस्वी वक्तव्य को उपस्थित जनसमूह ने अत्यंत सराहा। धर्म रक्षा सम्मेलन में उपस्थित संत-महात्माओं स्वामी विशुद्धानंद सरस्वती, स्वामी व्रतानंद सरस्वती, स्वामी सुधानंद सरस्वती सहित अन्य साधु-संतों ने उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।

इस अवसर पर वानप्रस्थी सुरेश मुनि, वानप्रस्थी सचेतन मुनि, आचार्य भगवन देव, वानप्रस्थी चैतन्य मुनि, धनुर्धर महापात्र, शिव प्रसाद पात्र, रमेश भोई, बैसाखू सेठ, आचार्य कृष्णदेव शास्त्री, आचार्य बृहस्पति शास्त्री, आचार्य पूर्णानंद शास्त्री, सोमदत्त शास्त्री, प्रेम प्रकाश शास्त्री, आरुणि कुमार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का परिचय:
यह धर्म रक्षा सम्मेलन आर्य समाज के 150वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित व्यापक जन-जागृति अभियान का हिस्सा था, जिसमें राष्ट्र रक्षा महायज्ञ, वैदिक प्रचार-प्रसार एवं समाज में धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को सशक्त करने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

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