Thursday, March 5, 2026

स्टील इम्प्लॉईज़ वेलफेयर एसोसिएशन (सेवा) ने जीपीएआईएस 2026–27 के लिए विकल्प भरने की प्रक्रिया शुरू की….

15 दिसंबर तक कर्मचारी ई-सहयोग पोर्टल में दर्ज करा सकेंगे अपनी सहमति या असहमति..

भिलाई। स्टील इम्प्लॉईज़ वेलफेयर एसोसिएशन (सेवा) ने आगामी वर्ष 2026–27 के लिए ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस स्कीम (GPAIS) के विकल्प संबंधी महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। सेवा द्वारा संचालित यह बीमा योजना प्रत्येक वर्ष 1 मार्च से 28/29 फरवरी तक लागू रहती है और भिलाई इस्पात संयंत्र के सभी सदस्य कार्मिक इसके दायरे में आते हैं।

दुर्घटना की स्थिति में ₹30 लाख तक का मुआवज़ा

सेवा ने बताया कि वर्ष 2026–27 के लिए दुर्घटना की स्थिति में पात्र आश्रितों को ₹30 लाख तक मुआवज़ा राशि प्रदान की जाएगी। यह राशि संबंधित बीमा कंपनी द्वारा पॉलिसी की शर्तों तथा पात्रता के अनुसार दी जाती है।

एल-1 प्रक्रिया से बीमा कंपनी का चयन

इस योजना के संचालन के लिए प्रत्येक वर्ष एल–1 (Lowest Bidder) प्रक्रिया के आधार पर किसी प्रतिष्ठित बीमा कंपनी का चयन किया जाता है। चयनित कंपनी को पॉलिसी संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाती है।
प्रीमियम राशि का भुगतान कर्मचारियों के वेतन से सामूहिक कटौती के माध्यम से किया जाता है।

इस वर्ष भी कर्मचारियों की सहमति अनिवार्य

शासी समिति ने पिछले वर्ष की तरह इस बार भी निर्णय लिया है कि किसी भी नई पॉलिसी को लागू करने से पहले सभी सदस्य कार्मिकों की सहमति प्राप्त की जाए।

यदि कोई कर्मचारी GPAIS 2026–27 में शामिल नहीं होना चाहता है तो वह —
15 दिसंबर 2025 तक
ई-सहयोग पोर्टल में उपलब्ध “नहीं” विकल्प चुनकर
अपनी असहमति दर्ज करा सकता है।

जो कर्मचारी यह विकल्प नहीं भरेंगे, उन्हें स्वयं सहमत माना जाएगा और वे स्वतः योजना में शामिल हो जाएंगे।

प्रीमियम और मुआवज़ा राशि पर पड़ सकता है प्रभाव

सेवा ने यह भी स्पष्ट किया है कि—

  • असहमति विकल्प भरने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ने पर बाक़ी कर्मचारियों की प्रीमियम राशि बढ़ सकती है,
  • अथवा मुआवज़ा राशि में कमी भी संभव है।

साथ ही, विकल्पों के समय से पूर्व प्राप्त हो जाने पर शासी समिति प्रीमियम राशि को एक या अधिक किस्तों में काटने पर भी विचार कर सकती है।

सेवा का अनुरोध

सेवा ने सभी सदस्य कार्मिकों से अपील की है कि वे समय सीमा के भीतर विकल्प दर्ज करें ताकि बीमा योजना का सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जा सके और प्रीमियम निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

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