Friday, April 17, 2026

संघर्ष की नींव पर संकट मोचन का पहरा : जहां ‘सीमेंट फैक्ट्री’ के खिलाफ सुलग रही थी क्रांति, अब वहीं विराजेगे ‘किसान हनुमान’; 55 गांवों की अखंड एकता का विजय पर्व

खैरागढ़ : खैरागढ़ छुईखदान गंडई जिले का दनिया–अतरिया–उदयपुर–हनईबन अंचल आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां भक्ति का सैलाब और संघर्ष की ज्वाला एक साथ मिलने जा रही है। यह महज एक मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा नहीं है, बल्कि उस ‘क्रांति स्थल’ का शुद्धिकरण और शक्ति-वर्धन है, जहां कभी ग्रामीणों ने अपनी माटी को सीमेंट फैक्ट्री के प्रदूषण और कब्जे से बचाने के लिए शपथ ली थी। आगामी 02 अप्रैल 2026 को नवनिर्मित ‘किसान हनुमान मंदिर’ में होने वाला महोत्सव इस क्षेत्र की आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वाभिमान का ‘विजय स्तंभ’ बनने जा रहा है।

संघर्ष की नींव पर ‘संकटमोचन’ का पहरा
इतिहास गवाह है,कि इसी भूमि पर महीनों तक 55 गांवों के किसानों ने बैठकर सीमेंट फैक्ट्री के विरोध में रणनीति बनाई थी।। ग्रामीणों का अटल विश्वास है,कि जिस स्थान पर उन्होंने अपनी ‘धरती मां’ की रक्षा का संकल्प लिया, वहां अब स्वयं अंजनी पुत्र विराजमान होकर उनके हक की रक्षा करेंगे।। “सबकी पीड़ा हरने वाले” हनुमान जी को किसानों ने अपना सेनापति मान लिया है, जो अब न केवल उनके आध्यात्मिक संकट हरेंगे, बल्कि उनके ‘जल-जंगल-जमीन’ पर आने वाले हर खतरे के सामने ढाल बनकर खड़े होंगे।।

आस्था का जन-सैलाब,55 गांवों की एक ही आवाज
28 मार्च से शुरू होने वाला यह छह दिवसीय महाकुंभ पूरे अंचल की धमनियों में जोश भर रहा है।। आयोजन समिति की अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल और संरक्षक गिरवर व मोतीलाल जंघेल के मार्गदर्शन में घर-घर से समर्थन उमड़ रहा है।।

शोभायात्रा से शक्ति प्रदर्शन
28 मार्च को विचारपुर से निकलने वाली शोभायात्रा 55 गांवों के स्वाभिमान को समेटकर जब सड़कों पर उतरेगी, तो वह दृश्य प्रशासन के लिए जनता की अटूट एकता का प्रमाण होगा।। 01 अप्रैल को शुरू होने वाला 24 घंटे का ‘राम नाम जाप’ केवल भजन नहीं, बल्कि उस संकल्प को दोहराना है,जो किसानों ने अपनी जमीन की रक्षा के लिए लिया है।।आयोजन के मुख्य सूत्रधार और संयोजक सुधीर गोलछा ने इस महोत्सव को एक नई वैचारिक ऊंचाई दी है।। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह मंदिर किसानों की एकजुटता का ‘अभय किला’ है।। जब 02 अप्रैल को दक्षिणमुखी संकटमोचन हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा होगी, तो वह इस बात का ऐलान होगा कि किसान अब अकेला नहीं है।। सुधीर गोलछा ने हुंकार भरते हुए कहा “आस्था की गदा अब हमारे हाथ में है, जो हमारी माटी की तरफ आंख उठाने वालों के अहंकार को चूर-चूर कर देगी।”

युवाओं का नेतृत्व और सर्वसमाज का संकल्प
सौरभ जंघेल, विक्रम यादव, प्रियंका चंदेल और पूरी युवा ब्रिगेड ने इस आयोजन को एक डिजिटल आंदोलन में बदल दिया है।। खैरागढ़ के सभी समाज प्रमुखों की भागीदारी यह संदेश दे रही है,कि जब बात माटी और मंदिर की आती है, तो सारा जिला एक हो जाता है। 50 सदस्यीय विशेष टीम द्वारा तैयार किया जा रहा विशाल भंडारा इस बात का प्रतीक है,कि संघर्ष के इस रास्ते पर कोई भी अकेला या भूखा नहीं रहेगा।।
हजारों की संख्या में जुटने वाले किसानों और श्रद्धालुओं की इस ‘विराट एकता’ ने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी यह आयोजन प्रशासन को सीधे चेतावनी है,कि जिस फैक्ट्री का विरोध जनता ने किया था, उस स्थान पर अब ‘भगवान’ का पहरा है।।

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