वरिष्ठ पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन के वाल से भिलाई शायर अमीर मीनाई की एक बेहद मकबूल गजल का ये मिसरा ‘’आहिस्ता-आहिस्ता’’ ही सहीं अब जाकर मेरे शहर भिलाई पर असर करता दिख रहा है। बीते करीब 2.5 दशक से बहुत कुछ फाइलों पर चल रहा था। लेकिन अब सेल-भिलाई स्टील प्लांट मैनेजमेंट ने नागरिक सुविधाओं के निजीकरण की तरफ पूरी तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं।
अढ़ाई दशक पहले के सेल के चेयरमैन अरविंद पांडेय ने कहा था कि-‘’ हमारा काम सिर्फ स्टील बनाना है, स्कूल-अस्पताल चलाना नहीं’’, तो उस वक्त यह भविष्य की तैयारी की आहट थी। इसके बाद भिलाई के स्कूल-अस्पताल लेने कई भारी-भरकम कोशिशें हुईं। छत्तीसगढ़ के साथ-साथ दिल्ली की बड़ी पार्टियों ने ‘बाबूजी’ से लेकर ‘नेताजी’ तक के जरिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल भी किया।

कुछ तो यहां आकर सर्वे भी कर गए लेकिन सब कुछ धीमी गति से चलता रहा। इस बीच घटते मैन पावर के साथ स्कूल और अस्पताल के खाली होते भवन जर्जर होते गए। अब जाकर आज सेल-भिलाई स्टील प्लांट ने मैत्री बाग और अपने कुछ स्कूलों के संचालन के लिए रूचि की अभिव्यक्ति (EOI) को जारी किया है। सेल की वेबसाइट में इसकी तफसील देख सकते हैं। तैयारी मेडिकल सेवाओं से भी हाथ खींचने की है। अब आगे-आगे देखिए और क्या-क्या होता है।
इन सबका रस्मी विरोध तो होगा लेकिन फिलहाल नहीं लगता कि सरकार के लिए कदम पीछे खींचने जैसी कोई नौबत आएगी। क्योंकि पिछले साल भिलाई में स्थापित एक सार्वजनिक उपक्रम फैरो स्क्रैप निगम लिमिटेड (एफएसएनएल) को बेच कर सरकार पहले ही ‘हैलो, माइक टेस्टिंग 1-2-3’ करके देख चुकी है। तब भी रस्मी तौर पर ही विरोध हुआ था।
इसलिए अब पूरी रफ्तार से निजीकरण होगा। मुमकिन है बीएसपी मैनेजमेंट अपने स्थाई कर्मियों के लिए एनएसपीसीएल टाइप की छोटी सी प्राइवेट कॉलोनी बनाकर चारों तरफ गार्ड लगवा दे और बचा हुआ टाउनशिप भी किसी प्रभावशाली को संचालन के लिए दे दे। फैज तो ‘’हम देखेंगे’’ कह चुके लेकिन अब देखने की बारी हमारी पीढ़ी की है…
(यहां तस्वीरें इकॉनॉमिक्स टाइम्स में साल 1999 में सेल चेयरमैन अरविंद पांडेय के इंटरव्यू की और आज भिलाई स्कूल व मैत्रीबाग के लिए जारी रूचि की अभिव्यक्ति (EOI) की।




