छत्तीसगढ़ का खैरागढ़ और डोंगरगढ़ क्षेत्र अब विदेशी प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय बनता जा रहा है। साइबेरिया, रूस, मंगोलिया और मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर आने वाले दुर्लभ पक्षी यहां के जलाशयों, तालाबों और वेटलैंड्स में डेरा जमा रहे हैं।
कॉमन क्रेन, ब्राह्मणी बतख, नॉर्दर्न शोवलर, फ्लेमिंगो, पेलिकन और ब्लूथ्रोट जैसे आकर्षक पक्षियों की मौजूदगी इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ पारिस्थितिकी का संकेत मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार छत्तीसगढ़ “सेंट्रल एशियन फ्लाईवे” का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां हर साल अक्टूबर से मार्च तक विदेशी परिंदों की चहचहाहट से जलाशय गुलजार रहते हैं।
हालांकि प्रदूषण, जलाशयों का सिकुड़ना और अवैध शिकार इन पक्षियों के अस्तित्व के लिए खतरा बन रहे हैं। पर्यावरणविदों ने वेटलैंड्स संरक्षण और सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने की अपील की है।
विश्व प्रवासी पक्षी दिवस प्रकृति संरक्षण और जैव विविधता बचाने का वैश्विक संदेश देता है।




