राजनांदगांव। जिले में पिछले दो दिनों से लगातार बारिश और अधिक नमी को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को धान, सोयाबीन, अरहर, उड़द, मूंग और कपास की फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन की सलाह दी है।
विभाग ने कहा कि खेतों में नमी बढ़ने से फफूंदजनित रोग और कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। किसानों को नियमित निगरानी कर अनुशंसित दवाओं का ही उपयोग करना चाहिए।

धान – वर्तमान में 70-80 दिन की फसल दाना भरने की अवस्था में है। इसमें भूरा माहू, पैनिकल माइट, गंधी बग, तना छेदक, पत्ती लपेटक और ब्लास्ट, भूरा धब्बा, शीथ ब्लाइट की निगरानी करें। भूरा माहू के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल 100 मिली/एकड़ या डाइनोटेफ्यूरान + पाइमेट्रोजीन 100 ग्राम/एकड़ उपयोगी है। अनावश्यक कीटनाशी और यूरिया से बचें। गंधी बग के लिए लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 5% ईसी 100 मिली/एकड़, तना छेदक-पत्ती लपेटक के लिए प्रोफेनोफॉस+साइपरमेथ्रिन 400 मिली/एकड़ की सलाह है। ब्लास्ट के लिए ट्राइसाइक्लाजोल 75% WP 120 ग्राम/एकड़, भूरा धब्बा के लिए मैनकोजेब 75% WP का प्रयोग करें।

सोयाबीन – फली बनने की अवस्था में तना मक्खी, गर्डल बीटल, सफेद मक्खी और रस्ट, एन्थ्रेक्नोज पर नजर रखें। पीला मोजेक दिखने पर रोगग्रस्त पौधे उखाड़कर नष्ट करें।
अरहर, उड़द, मूंग – फली छेदक, तंबाकू इल्ली, सफेद मक्खी की निगरानी करें। पक्षी बैठका और फेरोमोन ट्रैप लगाएं। पीला मोजेक वाले पौधे हटाएं।
कपास – फूल और टिंडे बनने की अवस्था में गुलाबी सुंडी के लिए फेरोमोन ट्रैप से निगरानी जरूरी है।
विभाग ने अपील की है कि बारिश के दौरान छिड़काव न करें, पत्तियां सूखने पर ही करें, बिना पहचान दवा न डालें, जल निकासी बनाए रखें और छिड़काव के दौरान मास्क-दस्ताने पहनें। किसी भी लक्षण पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।





