कोरोना काल की बंद बस की फीस बताकर रोके दस्तावेज़, प्रशासन से की गई शिकायत
राजनांदगांव बोरी। नीरज पब्लिक स्कूल, बोरी की मनमानी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। कक्षा 12वीं उत्तीर्ण छात्रा उन्नति कोटड़ियां, सुपुत्री दिलीप कोटड़ियां को सभी निर्धारित शैक्षणिक शुल्क पूर्ण रूप से जमा करने के बावजूद पिछले तीन वर्षों से स्थानांतरण प्रमाण पत्र (TC) एवं अंकसूची नहीं दी जा रही है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस या लिखित जानकारी के अब स्कूल प्रबंधन यह कहकर दस्तावेज़ देने से इनकार कर रहा है कि छोटे भाई की कोरोना काल की स्कूल बस फीस बकाया है।
जबकि सर्वविदित है कि कोरोना महामारी के दौरान स्कूल पूर्णतः बंद थे और बस सेवा भी संचालित नहीं हुई।
उच्च शिक्षा बाधित, भविष्य दांव पर
उन्नति कोटड़ियां ने प्रशासन को दिए आवेदन में स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण प्रमाण पत्र और अंकसूची के अभाव में उनकी उच्च शिक्षा गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन न तो कोई लिखित आदेश दे रहा है और न ही कानूनी आधार प्रस्तुत कर पा रहा है।
कानून के विरुद्ध दस्तावेज़ रोकना
शिक्षा नियमों के अनुसार,
शुल्क विवाद के नाम पर छात्रा के शैक्षणिक दस्तावेज़ रोकना अवैध है
एक छात्र के दस्तावेज़ को दूसरे छात्र की कथित बकाया राशि से जोड़ना नियमों का खुला उल्लंघन है
इसके बावजूद स्कूल द्वारा दबाव बनाकर मनमानी वसूली का प्रयास किया जा रहा है।
जिलाधिकारी से न्याय की गुहार
पीड़ित छात्रा ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप एवं उचित कार्यवाही की मांग की है, ताकि
स्थानांतरण प्रमाण पत्र
अंकसूची
तत्काल उपलब्ध कराई जा सके और भविष्य के साथ खिलवाड़ रोका जा सके।
अब सवाल प्रशासन पर
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा माफिया पर प्रशासन शिकंजा कसेगा?
क्या छात्रा को उसका हक़ मिलेगा या मामला ठंडे बस्ते में जाएगा?
अब देखना है… प्रशासन क्या कदम उठाता है।




