Thursday, August 6, 2026

पद्मविभूषण तीजन बाई को विश्वविद्यालय में दी गई सांगीतिक श्रद्धांजलि, पंडवानी की विविध शैलियों ने किया भाव-विभोर

(यतेन्द्र जीत सिंह छोटू ब्यूरो चीफ जिला खैरागढ़)
खैरागढ़ :
इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा की अध्यक्षता में पद्मविभूषण स्वर्गीय तीजन बाई को समर्पित सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया।। कार्यक्रम में पंडवानी की वेदमती एवं कापालिक शैली की प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से महान लोकगायिका तीजन बाई को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री उषा बारले सहित अतिथि चेतन देवांगन, रम्भा बाई देशमुख, सावित्री पारधी, रेडु देशमुख (तीजन बाई परिवार), आलिम बंशी, केवल देशमुख, चैतराम साहू, रामचंद निषाद, नरोत्तम निषाद तथा तीजन बाई के वरिष्ठ संगतकार डालेश्वर निर्मल उपस्थित रहे।। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव वेंकटरमन गुड़े, लोकसंगीत विभाग के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. राजन यादव, संगीत संकाय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. नमन दत्त सहित विश्वविद्यालय परिवार की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण सुप्रसिद्ध पंडवानी कलाकार एवं भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय द्वारा वर्ष 2016 में संगीत नाटक अकादमी के प्रतिष्ठित “उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ युवा पुरस्कार” से सम्मानित तथा वर्ष 2020 में संस्कृति मंत्रालय की संस्था सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT) से जूनियर फेलोशिप अवार्ड प्राप्त श्री दुष्यंत द्विवेदी की प्रस्तुति रही।। उन्होंने वेदमती शैली में “द्रौपदी स्वयंवर” का सजीव एवं प्रभावशाली गायन प्रस्तुत कर अपनी विशिष्ट शैली से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।। उन्हें वर्ष 2025 में भाग्य विधाता सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है।। श्री दुष्यंत द्विवेदी देश के विभिन्न प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं।

उनकी प्रस्तुतियाँ गुवाहाटी एवं सिलचर (असम), रंग स्वाधीनता (नई दिल्ली), अमृत स्वरधारा युवा उत्सव (सूरत, गुजरात), महाराज कुमारी विनोदिनी देवी समारोह (इम्फाल, मणिपुर), प्रयागराज महाकुंभ-2025 के कलाग्राम में भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय के आमंत्रण पर चार दिवसीय मंचन, मुंबई फिल्म सिटी तथा फरवरी 2026 में भारत के कैबिनेट सचिव श्री टी.वी. सोमनाथन के नई दिल्ली स्थित निवास पर विशेष प्रस्तुति सहित अनेक राष्ट्रीय मंचों पर हो चुकी हैं।।

इस अवसर पर बिलासपुर निवासी वरिष्ठ पंडवानी गायिका श्रीमती दूजन बाई ने कापालिक शैली में “द्रौपदी चीरहरण” प्रसंग की अत्यंत मार्मिक प्रस्तुति दी। उनकी भावपूर्ण गायकी और सशक्त अभिनय ने पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया।। दूजन बाई देश के अनेक राज्यों तथा छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंचों पर अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के लिए विशेष पहचान रखती हैं।। विश्वविद्यालय के लोकसंगीत विभाग के छात्र हर्ष चंद्राकर ने कापालिक शैली में “दुःशासन वध” प्रसंग का प्रभावशाली गायन प्रस्तुत किया।। उनकी ओजपूर्ण प्रस्तुति को उपस्थित विद्वानों एवं दर्शकों ने सराहा। हर्ष चंद्राकर ग्राम मथानी खुर्द, जिला कबीरधाम के निवासी हैं तथा पिछले दस वर्षों से पंडवानी साधना में सक्रिय हैं। वे वृंदावन कृष्ण कला महोत्सव, इंटरनेशनल थिएटर ओलंपियाड (जगन्नाथ पुरी), राज्योत्सव, भोरमदेव महोत्सव तथा गनियारी महोत्सव सहित अनेक प्रतिष्ठित आयोजनों में अपनी प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं। श्री दुष्यंत द्विवेदी की प्रस्तुति में संगतकारों के रूप में रागी परसराम यादव, हारमोनियम पर जीवनलाल साहू, बैंजो पर बिसहत राम साहू, तबला पर तुलसीदास मानिकपुरी, नाल पर श्री जीवन्तजय देवदास तथा झुमका पर श्री नरेन्द्र विश्वकर्मा ने प्रभावी संगत दी। हर्ष चंद्राकर की प्रस्तुति में रागी एवं तबला पर ज्ञानेश्वर टांडिया, कोरस में डोमन साहू, हारमोनियम पर उजित निषाद, ढोलक पर वेदप्रकाश रावटे, बैंजो पर करन तारम, मंजीरा पर खिलेश साहू तथा घुंघरू पर समीर चंद्र साहू ने संगत कर प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बनाया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित अतिथियों ने पद्मविभूषण स्वर्गीय तीजन बाई के लोककला एवं पंडवानी पर अमूल्य योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनकी कला आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।। पंडवानी की वेदमती एवं कापालिक दोनों शैलियों में प्रस्तुत इन भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने श्रद्धांजलि समारोह को अविस्मरणीय बना दिया।।

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