आरंग। शिकायतों की गर्मी आखिरकार कार्रवाई में बदल ही गई। शनिवार तड़के खनिज विभाग की टीम ने आरंग क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ जोरदार छापेमार अभियान चलाते हुए 4 चैन माउंटेन (पोकलेन) मशीनों को जब्त कर दिया। कार्रवाई में ग्राम चिखली रेत खदान से 2 और कुरूद खदान से 2 मशीनें पकड़ी गईं—वो भी ऐसे वक्त में, जब खनन पर आधिकारिक तौर पर ‘रात का पहरा’ होना चाहिए था।
मौके पर जांच में साफ हुआ कि खनन न सिर्फ स्वीकृत सीमा के बाहर हो रहा था, बल्कि प्रतिबंधित रात्रिकालीन समय में भी धड़ल्ले से जारी था। यानी नियम किताबों में और मशीनें जमीन पर—अपनी-अपनी राह पर चल रही थीं। प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए सभी मशीनों को सीलबंद कर अवैध उत्खनन पर रोक लगा दी।

सीमांकन फिर होगा, ‘खेल’ की सीमा तय होगी
खनिज विभाग ने संकेत दिए हैं कि खदानों का दोबारा सीमांकन कराया जाएगा, ताकि “कहां तक वैध और कहां से अवैध”—इस पर कोई बहाना न बचे। संबंधित पट्टेदारों और जुड़े लोगों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो गई है।
शिकायतें बनीं कार्रवाई की वजह
इस पूरे मामले की जड़ में वे शिकायतें रहीं, जिनमें पूर्व जिला पंचायत सदस्य और आप नेता परमानंद जांगड़े ने रात्रिकालीन खनन, सीमा से बाहर उत्खनन, अवैध वसूली और बिना रॉयल्टी रेत भंडारण जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। जांच में कई बिंदु सही पाए जाने के बाद ही विभाग हरकत में आया।

“अब नहीं चलेगा अवैध खेल”
खनिज अधिकारी राजेश मालवे ने साफ शब्दों में कहा कि जिले में अवैध उत्खनन को लेकर “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी। नियमित निरीक्षण और कड़ी निगरानी के जरिए ऐसे मामलों पर लगाम कसने की बात कही गई है।
रेत खदानों में लंबे समय से चल रहे “रात के खेल” पर यह कार्रवाई फिलहाल भारी पड़ती दिख रही है। लेकिन असली सवाल यही है—क्या यह सख्ती लगातार बनी रहेगी या फिर कुछ दिनों बाद मशीनें फिर से ‘अपनी रफ्तार’ पकड़ लेंगी? फिलहाल, आरंग में प्रशासन ने साफ संदेश दे दिया है—नियम तोड़ोगे, तो मशीनें नहीं, पूरी व्यवस्था ही जब्त हो जाएगी।



