Tuesday, October 27, 2026

दुर्ग में सुरक्षित बचपन अभियान: बच्चों को बताए जा रहे कानूनी अधिकार, बाल शोषण और साइबर खतरों से बचाव के तरीके

दुर्ग। बच्चों को उनके अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और कानूनी सहायता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सुरक्षित बचपन अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत जिले के विभिन्न विद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित कर बच्चों को बाल विवाह, बाल शोषण और इंटरनेट से जुड़े खतरों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार आयोजित इस अभियान का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के अध्यक्ष श्री के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। प्राधिकरण के सचिव श्री उमेश कुमार भागवतकर अभियान का समन्वय कर रहे हैं।

पांच विद्यालयों में आयोजित हुए विधिक जागरूकता शिविर

अभियान के तहत सरदार वल्लभभाई पटेल शासकीय माध्यमिक शाला, दुर्ग; स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, बोरसी; शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, बोरसी; शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, डुंडेरा तथा शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, जोरातराई में जागरूकता शिविर आयोजित किए गए।

इन कार्यक्रमों में न्यायिक अधिकारियों श्री रवि कुमार महोबिया, श्री वीरेंद्र सिंह, कु. रितिका ढिढी, कु. रुचिका महेश्वरी तथा कु. आकांक्षा सिंह ने सहभागिता की। पैनल अधिवक्ताओं और पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने भी बच्चों को कानूनी जानकारी देने में योगदान दिया।

छह विषयों के माध्यम से बच्चों को किया जा रहा जागरूक

अभियान की थीम “जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार” है। इसका संदेश है—“हर बच्चे का बचपन, हम सबकी जिम्मेदारी।”

बच्चों को उनकी उम्र और दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से छह प्रमुख विषयों पर जागरूक किया जा रहा है।

  • मेरा बचपन, मेरा अधिकार
  • कानून जानो, बचपन बचाओ
  • सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन
  • बोलो, बताओ, बचाओ
  • ना बाल विवाह, ना बाल शोषण
  • जागरूक बचपन, सशक्त भारत

इन विषयों के माध्यम से बच्चों को अपने अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और उपलब्ध सहायता व्यवस्थाओं की जानकारी दी जा रही है।

बाल शोषण और ऑनलाइन खतरों से बचाव की जानकारी

अभियान के दौरान बच्चों को असुरक्षित परिस्थितियों की पहचान करने, अनुचित व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने और किसी विश्वसनीय व्यक्ति अथवा सक्षम प्राधिकारी से सहायता मांगने के महत्व के बारे में बताया जा रहा है।

बच्चों को यह समझाने पर जोर दिया जा रहा है कि उनकी सुरक्षा, गरिमा और सम्मान महत्वपूर्ण हैं। किसी भी प्रकार के शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में चुप रहना जरूरी नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में सहायता प्राप्त करने के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी होना आवश्यक है।

इसके साथ ही बच्चों को निःशुल्क विधिक सहायता तथा बाल संरक्षण से संबंधित सहायता व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।

बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए सामूहिक जिम्मेदारी

सुरक्षित बचपन अभियान का पहला चरण दुर्ग जिले के अधिकाधिक विद्यालयों तक पहुंचने और बच्चों में अपने अधिकारों के प्रति समझ विकसित करने पर केंद्रित है। अभियान के माध्यम से बाल विवाह, बाल शोषण और ऑनलाइन जोखिमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में परिवार, विद्यालय और समाज की भूमिका को भी रेखांकित किया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना, उन्हें अपनी बात कहने का साहस देना और जरूरत पड़ने पर सहायता प्राप्त करने के रास्तों से परिचित कराना है, ताकि प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास किए जा सकें।

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