भिलाई। बुद्धिजीवी फिल्म समीक्षक संघ के सदस्यों द्वारा बहुचर्चित फिल्म ‘धुरंधर’ देखी। कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष विकास यादव ने की, जबकि महासचिव डॉ. अजय आर्य सहित कई वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। फिल्म पर अपने विचार प्रस्तुत करने वालों में फेबुलस एक्का और धर्मेंद्र कुमार यादव भी शामिल रहे, जिन्होंने फिल्म की तकनीक, संरचना और संदेश को प्रभावी बताया।
फिल्म ‘धुरंधर’ की शुरुआत कुख्यात कंधार विमान अपहरण से होती है और इसके बाद कहानी कई अध्यायों के रूप में आगे बढ़ती जाती है। निर्देशक ने प्रत्येक अध्याय को इस तरह जोड़ा है कि दर्शक भारतीय सुरक्षा तंत्र के उन अनदेखे पहलुओं को समझ पाते हैं जिनकी जानकारी सामान्यतः सार्वजनिक नहीं होती। फिल्म में उन समकालीन घटनाओं की ओर भी संकेत किया गया है जिनमें अज्ञात हमलावर कई खूंखार आतंकवादियों का सफाया कर रहे हैं।
संघ के विशेषज्ञों ने माना कि ‘धुरंधर’ केवल थ्रिलर नहीं बल्कि राष्ट्र सुरक्षा के गुमनाम और गहरे तंत्र को उजागर करने वाली एक साहसिक फिल्म है। इसमें यह विचार प्रभावी रूप से उभरता है कि भारत की सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात सैनिकों से नहीं, बल्कि अनगिनत अदृश्य वीरों से भी चलती है जो जासूस, मिशन एजेंट या सामान्य नागरिक की भूमिका में राष्ट्ररक्षा में जुटे रहते हैं। फिल्म इन्हीं ‘अनाम नायकों’ को समर्पित है।

समीक्षा के दौरान फेबुलस एक्का ने कहा – ‘फिल्म की ग्रिप और रिसर्च इसे खास बनाती है, दर्शक लगातार जुड़ाव महसूस करता है।’
धर्मेंद्र कुमार यादव ने कहा – ‘यह फिल्म मनोरंजन से अधिक एक दस्तावेज जैसी लगती है, जो राष्ट्र सुरक्षा की जटिलताओं को सामने लाती है।’
महासचिव डॉ. अजय आर्य ने कहा – ‘धुरंधर उन नायकों की कहानी है जिनकी पहचान छिपी रहती है, परंतु राष्ट्र उन्हीं के साहस पर टिका है।’
अध्यक्ष विकास यादव ने फिल्म के संदेश की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी फिल्मों से युवाओं को वास्तविक सुरक्षा तंत्र की समझ मिलती है और राष्ट्र के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है।
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और रिसर्च भी उल्लेखनीय है। अफगानिस्तान, बलूच क्षेत्रों और वहाँ की बस्तियों के चित्रण में निर्देशक ने वास्तविक लोकेशनों और लोकसंस्कृति को सटीकता के साथ प्रस्तुत करने की साहसिक कोशिश की है, जो फिल्म को और प्रामाणिक बनाता है।
कुछ दर्शकों ने फिल्म में हिंसा और गाली-गलौज के प्रयोग पर आलोचना भी की है, किंतु समीक्षक संघ का मत है कि वर्तमान समाज में गाली का प्रसार बढ़ गया है और यह अब लोगों को उतना असहज नहीं करता। साथ ही यह फिल्म एक्शन श्रेणी की है, जहाँ हिंसा और तेज घटनाक्रम अपेक्षित होते हैं। ऐसे दर्शक जो एक्शन और यथार्थवादी दृश्यों को पसंद करते हैं, उनके लिए यह फिल्म अत्यंत प्रभावी साबित होगी।




