दुर्ग । 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी में भाग लेकर लखनऊ से लौटे छात्र-छात्राओं और शिक्षकों का स्थानीय रेलवे स्टेशन पर उत्साहपूर्ण और गरिमामय स्वागत किया गया। 23 नवंबर से 29 नवंबर तक आयोजित इस जंबूरी में देशभर के लगभग 45000 प्रतिभागियों ने भाग लिया था। इनके बीच स्वयं को स्थापित करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। डॉ अजय आर्य ने कहा कि इतनी विशाल प्रतियोगी पृष्ठभूमि में अपनी पहचान बनाना अनुशासन, समर्पण और निरंतर प्रयास का परिणाम है।
जंबूरी के दौरान छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा तथा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा, भाषा और वेशभूषा का प्रभावी प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों ने एडवेंचर एक्टिविटीज, पायनियरिंग , फर्स्ट-एड ड्रिल, कल्चरल शो, योग, मार्च पास्ट कैम्प क्राफ्ट, अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम, पर्यावरण जनजागरूकता गतिविधियाँ और विभिन्न प्रतिस्पर्धात्मक इवेंट्स में सक्रिय भागीदारी की। छात्रों के नेतृत्व और प्रेरणा में योग्य शिक्षक साथ रहे, जिन्होंने निरंतर मार्गदर्शन दिया। डॉ अजय आर्य ने कहा कि कई बार मौसम, परिस्थितियाँ और आसपास के विचार अनुकूल नहीं होते, किंतु वास्तविक चुनौती यही है कि हम अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सामंजस्य और संतुलन के साथ आगे बढ़ें और विजय का मार्ग चुनें।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अनेक प्रमुख राष्ट्रीय हस्तियों के विचारों को जंबूरी में सीधे सुनने का अवसर छात्रों को मिला, जो उनके व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा।
प्रतिभागी शिक्षक दल में डॉ मोना अली, सुजल वर्मा, ऋषभ वर्मा, ऋषभ चतुर्वेदी, शिवम राय, मोनिश लैशर, संभव प्रताप उपाध्याय, आदर्श कुमार, कृष्णकांत, साक्षी साहू, अनुष्का शर्मा, गरिमा वर्मा, रिया ठाकुर, आरुषि शाह, ज्योति बांदे, मानवी सोनी और अनुग्रह शामिल रहे। सभी प्रतिभागियों ने जंबूरी में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक हिस्सा लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
स्टेशन पर डॉन सिंह साहू, रूबी साहू सहित विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक उपस्थित रहे और सभी प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। डॉन सिंह साहू और रूबी साहू ने डॉ अजय आर्य से जंबूरी अनुभवों के बारे में जानकारी ली। डॉ. अजय आर्य ने बताया कि जब बच्चे अपने माता-पिता और परिचित वातावरण से दूर नए स्थान पर जाते हैं, तो वे वहाँ की परिस्थितियों से सामंजस्य स्थापित करते हुए चुनौतियों का सामना करना सीखते हैं और उनका व्यक्तित्व अधिक मजबूत बनकर उभरता है। इसी कारण अध्ययन के साथ-साथ ऐसी गतिविधियों में भाग लेना आवश्यक है, क्योंकि ये अनुभव बच्चों को नेतृत्व क्षमता, सहयोग, आत्मविश्वास और जीवन-गतिविधियों का वास्तविक ज्ञान प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी शायर ने ठीक कहा है- धूप निकलो घटाओ में नहाकर देखो। जिंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो। साक्षी साहू ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मेरे शिक्षकों ने मुझे नैतिक बल प्रदान किया और जब-जब कोई परेशानी आई उसका समाधान नैतिक और बौद्धिक रूप से तत्काल किया मैं इसलिए उनका धन्यवाद करती हूं। अनीता दरपने, वी लाकरा सहित शिक्षक शिक्षिकाओं ने छात्रों का हौसला बढ़ाया।
डॉ. अजय आर्य एवं अभिभावकों ने केंद्रीय विद्यालय संगठन की उपायुक्त पीबीएस उषा, सहायक आयुक्त रवींद्र कुमार, प्राचार्य उमाशंकर मिश्रा एवं अशोक चंद्राकर का विशेष रूप से धन्यवाद करते हुए आभार जताया।




