AIDSO ने शिक्षक भर्ती आंदोलनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की निंदा की

नोटिस वापस लेने और 57,000 पदों पर भर्ती शुरू करने की मांग

दुर्ग। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन AIDSO ने शिक्षक भर्ती में विज्ञान सहित सभी विषयों को शामिल करते हुए 57,000 शिक्षकों की भर्ती की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।

AIDSO जिला कमेटी दुर्ग की जिला सचिव मेनका निषाद ने जारी प्रेस वक्तव्य में कहा कि अपनी जायज और लोकतांत्रिक मांगों को लेकर एकत्र हुए अभ्यर्थियों को बलपूर्वक रोका गया और बाद में “शांति भंग करने की आशंका” का आरोप लगाकर नोटिस जारी किए गए। यह लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला दमन है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है। शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे अभ्यर्थी हिंसा या तोड़फोड़ के लिए नहीं, बल्कि रोजगार और शिक्षा के अधिकार से जुड़े मुद्दे को सरकार के सामने रखने के लिए एकत्र हुए थे। ऐसे शांतिपूर्ण आंदोलन को अपराध की तरह प्रस्तुत करना और छात्रों को नोटिस जारी कर भय का माहौल बनाना अत्यंत निंदनीय और अलोकतांत्रिक है।

AIDSO ने कहा कि बेरोजगार युवाओं की आवाज को प्रशासनिक दमन से दबाया नहीं जा सकता। सरकार और प्रशासन का दायित्व समस्याओं का समाधान करना है, न कि कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर डराना।

AIDSO की मांगें

  1. शिक्षक भर्ती आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों को जारी सभी नोटिस तत्काल वापस लिए जाएं।
  2. उनके विरुद्ध की गई अनावश्यक कार्रवाई समाप्त की जाए।
  3. शिक्षक भर्ती में विज्ञान सहित सभी विषयों को शामिल करते हुए 57,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए।

AIDSO ने चेतावनी दी है कि यदि छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का यह प्रयास जारी रहा, तो संगठन प्रदेशभर के छात्र-युवाओं के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक विरोध करेगा।

“लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन करना अधिकार है, अपराध नहीं”

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