बच्चियों के सहयोग के लिए प्रशासन, नागरिक जन, सेवी संस्थाएं हुए जागरूक,
खैरागढ़: सुंदुर वनांचल क्षेत्र निजामडीह गांव की मार्मिक कहानी KCG जिले के छुईखदान ब्लाक के वनांचल क्षेत्र के सुदूर ग्राम निजामडीह (ग्राम पंचायत समुंदपानी) में मानवीय संवेदनाओं की एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है।।
सात मासूम बेटियों के सिर से मां का साया उठने के बाद जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयं सेवी संस्थाएं, नागरिक जनो ने आगे बढ़कर इन बच्चियों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है।। करीब तीन महीने पहले अमर सिंह की पत्नी का ब्रेन ट्यूमर के कारण निधन हो गया था।।
इस दुखद घटना के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया
मां के जाने के बाद घर में सन्नाटा पसर गया और पीछे छूट गईं सात बेटियां, जिनकी उम्र महज 7 माह से 13 वर्ष के बीच है।। पिता अमर सिंह मजदूरी कर जैसे-तैसे परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं, लेकिन रोजी-रोटी की तलाश में बाहर जाने पर बच्चियां अक्सर घर में अकेली रह जाती हैं।।
प्रशासन ने बढ़ाया मदद का हाथ
इन विषम परिस्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन के अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने बच्चियों को गोद लेकर उनकी देखरेख और जरूरतों को पूरा करने का जिम्मा उठाया है।।
सरेश्वरी (7 माह): भरतलाल यादव, सरपंच समुंदपानी,
दुलेश्वरी (13 वर्ष) : स्वर्णिम शुक्ला, सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग,
उमेश्वरी (9 वर्ष): केश्वरी देवांगन, सीईओ जनपद पंचायत छुईखदान,
परमेश्वरी (7 वर्ष): दिनेश कुमार सिंह, एसडीओ, पीएचई विभाग,जागेश्वरी (5 वर्ष) – श्री इत्तर सिंह मांडवी, एसडीओ, पीएमजीएसवाई,
रामेश्वरी (4 वर्ष) : पी.आर. खुटेल, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी,
नागेश्वरी (2 वर्ष): सुसींद्रा पटेल, सक्रिय महिला स्व-सहायता समूह,
गांव में छाई थी खामोशी, अब लौटी उम्मीद
ग्रामीणों के अनुसार, पहले जिस घर में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां मां के निधन के बाद गहरी उदासी छा गई थी। बच्चियों के चेहरे की मुस्कान भी फीकी पड़ गई थी।। हालांकि, अब प्रशासन और समाज के सहयोग से उनके जीवन में नई उम्मीद जगी है।।
स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी समय-समय पर घर पहुंचकर बच्चियों की देखभाल कर रही हैं।। जरूरत के अनुसार भोजन, कपड़े और अन्य सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।।
समाज के लिए बनी मिसाल
यह पहल न केवल मानवीय संवेदनाओं का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि प्रशासन और समाज मिलकर किसी भी संकटग्रस्त परिवार के लिए मजबूत सहारा बन सकते हैं।। गांव के लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह सभी जरूरतमंद परिवारों के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाई जाए, तो कोई भी बच्चा असहाय नहीं रहेगा।।




