भिलाई। आम आदमी पार्टी के नेता जसप्रीत सिंह के नेतृत्व में आज दुर्ग जिला कलेक्टर को निजी स्कूलों द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान उन्होंने निजी स्कूलों द्वारा बस किराए में बेतहाशा वृद्धि, अवैध फीस बढ़ोतरी और कॉपी-किताबों के नाम पर फैलाए गए ‘छद्म एकाधिकार’ पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
प्रमुख मुद्दे और शिकायतें:
बस किराए में भारी विसंगति: ज्ञापन में बताया गया कि एक ही रूट होने के बावजूद अलग-अलग स्कूलों के किराए में जमीन-आसमान का अंतर है। उदाहरण के तौर पर, शंकराचार्य स्कूल (सेक्टर 10) कम दूरी होने पर भी ₹2,250 वसूल रहा है, जबकि अधिक दूरी वाले के.पी.एस. नेहरू नगर का किराया मात्र ₹1,150 है। यह सीधे तौर पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 का उल्लंघन है।

कॉपी-किताबों और ड्रेस का सिंडिकेट: स्कूल प्रबंधन द्वारा ऐसी विशिष्ट प्रकाशन की किताबें और ड्रेस निर्धारित की जाती हैं जो शहर के सामान्य स्टोर पर उपलब्ध नहीं होतीं। अभिभावकों को मजबूरन चुनिंदा दुकानों (जैसे तिवारी बुक डिपो) से महंगे दामों पर सामग्री खरीदनी पड़ती है।
मानसिक दबाव और फीस वृद्धि: मार्च महीने में परीक्षाएं खत्म होने के बावजूद पूरे महीने का बस शुल्क वसूला जाना और फीस जमा करने में देरी होने पर बच्चों का रिजल्ट रोकना सरासर अनुचित है।
आम आदमी पार्टी की प्रमुख मांगें:
कलेक्टर स्तर से रेट लिस्ट: जिला प्रशासन और आरटीओ के माध्यम से सभी निजी स्कूलों के लिए दूरी आधारित ‘बस किराया रेट लिस्ट’ जारी की जाए।
सामग्री की उपलब्धता: स्कूल केवल उन्हीं प्रकाशकों की किताबें लगाएं जो शहर के कम से कम 15 प्रमुख स्टोर्स पर उपलब्ध हों।
दंडात्मक कार्यवाही: नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर RTE एक्ट की धारा 15 के तहत भारी जुर्माना लगाया जाए।
पारदर्शी फीस प्रक्रिया: वार्षिक फीस वृद्धि पर तत्काल नियंत्रण लगाया जाए और इसे पारदर्शी बनाया जाए।
जसप्रीत सिंह ने कड़े शब्दों में कहा कि शिक्षा को व्यवसाय बना चुके इन संस्थानों पर अगर प्रशासन ने जल्द लगाम नहीं कसी, तो आम आदमी पार्टी अभिभावकों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी। उन्होंने प्रशासन से जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इन बिंदुओं की तत्काल जांच कराने की अपील की है।






