00 शिक्षकों का कहना है कि हमारी नियुक्ति के समय टीईटी अनिवार्यता नहीं थी,अब 20/25 वर्ष सेवा देने के बाद इसे जबरदस्ती थोपना न्यायसंगत नहीं है,
00 संघ के जिला अध्यक्ष रामलाल साहू का कहना है कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने सन् 2028 तक की छूट दी है, तो शिक्षकों को उनके वरिष्ठता के आधार पर रिक्त पदों पर पदोन्नति का अवसर दिया जाना चाहिए,
(यतेन्द्र जीत सिंह छोटू ब्यूरो चीफ जिला खैरागढ़)
खैरागढ़ : सालो से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षक शिक्षिकाओं पर जबरदस्ती शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) थोपना न्यायसंगत नहीं है।।सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता को लेकर विरोध तेज हो गया है।। इसी के खिलाफ शनिवार को शिक्षक साझा मंच के बैनर तले शिक्षकों ने बरसते पानी के बीच इतवारी बाजार रावण भांठा स्थित धरना स्थल पर ब्लॉक स्तरीय एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया।।
शिक्षकों ने रैली निकालकर एसडीएम कार्यालय पहुंचकर एसडीएम के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार वर्ष 2001 से 2011 के बीच नियुक्त प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। इसके लिए 21 अगस्त 2028 तक की समय सीमा निर्धारित की गई है।।

शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय टीईटी अनिवार्य नहीं थी
ऐसे में 20 से 25 वर्षों तक सेवा देने के बाद उन पर नई परीक्षा उत्तीर्ण करने की शर्त थोपना न्यायसंगत नहीं है।।
संघ के जिलाध्यक्ष रामलाल साहू ने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2028 तक की छूट दी है, तब शिक्षकों को उनकी वरिष्ठता के आधार पर रिक्त पदों पर पदोन्नति का अवसर दिया जाना चाहिए।। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की पदोन्नति में टीईटी की नई शर्त लागू करने से उनके हित प्रभावित होंगे।।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें,ये है
शिक्षकों ने मांग की है,कि वरिष्ठता के आधार पर बिना टीईटी की शर्त के व्याख्याता, शिक्षक, प्रधान पाठक पूर्व माध्यमिक शाला और प्रधान पाठक प्राथमिक शाला के रिक्त पदों पर पदोन्नति की जाए।। पूर्व सेवा अवधि की गणना कर पूर्ण पेंशन का लाभ दिया जाए।। केंद्रीय वेतनमान के आधार पर छत्तीसगढ़ के शिक्षकों का वेतन निर्धारण कर वेतन विसंगति दूर की जाए।। 13 फरवरी 2026 को जारी नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम को निरस्त किया जाए।। साथ ही प्रशिक्षित सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याताओं के लिए बीएड का विभागीय ब्रिज कोर्स कराया जाए।।
सुबह स्कूलो में सेवा देने के बाद,दोपहर में दिया धरना, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए शनिवार को आंदोलन
शिक्षकों ने कहा कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं करना चाहते।। इसी वजह से शनिवार को सुबह स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बाद दोपहर में धरना प्रदर्शन किया गया।। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 29 अगस्त को जिलास्तरीय हड़ताल की जाएगी।। इसके बाद शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर तक सरकार के निर्णय का इंतजार किया जाएगा।। मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेशभर के शिक्षक 9 सितम्बर को मुख्यमंत्री निवास और शिक्षा मंत्री निवास का घेराव करेंगे तथा इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।।
बरसते पानी के बावजूद शिक्षकों ने धरना स्थल से एसडीएम कार्यालय तक रैली निकालकर अपनी एकजुटता दिखाई और ज्ञापन सौंपते हुए सरकार से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।।





