लीनेस क्लब ऑफ दुर्ग सिटी ने स्कूली बच्चों को वितरित की शैक्षणिक सामग्री, सेवा और संवेदनशीलता का दिया अनुकरणीय संदेश
दुर्ग। “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की पावन भावना को आत्मसात करते हुए लीनेस क्लब ऑफ दुर्ग सिटी द्वारा अपने गोद लिए गए शासकीय प्राथमिक शाला, पोटिया कला में अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों को कॉपी, पेंसिल, स्केल, शार्पनर एवं इरेज़र के सेट वितरित किए गए। इस अवसर पर बच्चों के चेहरों पर प्रसन्नता की झलक देखते ही बन रही थी।
क्लब की अध्यक्ष ली. आकांक्षा मिश्रा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने बच्चों से अध्ययन सामग्री का सदुपयोग करने, नियमित रूप से विद्यालय आने, अनुशासन का पालन करने तथा अपने माता-पिता एवं शिक्षकों का सम्मान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज का शिक्षित और संस्कारित बालक ही कल एक आदर्श नागरिक बनकर राष्ट्र के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम में डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन (एजुकेशन) ली. विभा गुप्ता, माइक्रो चेयरपर्सन (एजुकेशन) ली. सीमा गुप्ता, क्लब की सचिव ली. बरखा बैस, कोषाध्यक्ष ली. ऋतु ठाकुर, पूर्व अध्यक्ष ली. लक्ष्मी चंद्राकर तथा विद्यालय की पूर्व प्राचार्य विजयलक्ष्मी ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहीं। सभी ने बच्चों से आत्मीय संवाद किया, उनका परिचय जाना, उनके सपनों और रुचियों के बारे में जानकारी ली तथा उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर बच्चों को बिस्कुट एवं चॉकलेट भी वितरित किए गए।
विद्यालय की प्राचार्य संध्या साहू ने लीनेस क्लब ऑफ दुर्ग सिटी के इस प्रेरणादायी प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक संस्थाओं का सहयोग विद्यार्थियों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण भी निर्मित करता है। उन्होंने सभी अतिथियों एवं क्लब सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

पिछले कुछ वर्षों से यह निरंतर देखने में आ रहा है कि लीनेस क्लब एवं लायंस क्लब से जुड़ी शिक्षित, संवेदनशील एवं समाजसेवा के प्रति समर्पित महिलाएं शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, खेल, महिला सशक्तिकरण तथा मानव सेवा के विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। ये महिलाएं केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहयोग, संवेदना और आत्मीयता पहुंचाने का सतत प्रयास करती हैं। उनके कार्य यह सिद्ध करते हैं कि निस्वार्थ मानव सेवा ही सबसे बड़ी उपासना है।
विशेष रूप से ली. आकांक्षा मिश्रा के नेतृत्व में पिछले दो-तीन वर्षों के दौरान सेवा कार्यों की एक प्रेरणादायी श्रृंखला देखने को मिली है। शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, महिला सशक्तिकरण, खेल गतिविधियों तथा जरूरतमंदों की सहायता जैसे अनेक क्षेत्रों में उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर निरंतर जनहित के कार्य किए हैं। उनका यह विश्वास है कि किसी बच्चे के हाथ में यदि पुस्तक, कॉपी और पेंसिल पहुंचती है तो वह केवल शैक्षणिक सामग्री नहीं, बल्कि उसके उज्ज्वल भविष्य की नींव होती है।
आज समाज को ऐसे ही सेवा-समर्पित व्यक्तित्वों और संस्थाओं की आवश्यकता है, जो बिना किसी स्वार्थ के मानवता की सेवा को अपना धर्म मानते हैं। लीनेस क्लब ऑफ दुर्ग सिटी और उसकी अध्यक्ष ली. आकांक्षा मिश्रा का यह सतत सेवा अभियान न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। ऐसे कार्य यह संदेश देते हैं कि वास्तविक पूजा केवल मंदिरों में दीप जलाने से नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद के जीवन में आशा, शिक्षा और आत्मविश्वास का दीप जलाने से होती है।
ऐसे सेवा कार्यों के बीच एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी समाज के सामने खड़ा होता है कि शासन-प्रशासन का ध्यान ऐसे निस्वार्थ एवं मानवीय कार्यों की ओर अपेक्षित रूप से क्यों नहीं जाता। जो व्यक्ति और संस्थाएं बिना किसी स्वार्थ के शिक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य, खेल, महिला सशक्तिकरण एवं मानव सेवा के क्षेत्र में निरंतर उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं, उन्हें समय-समय पर शासन एवं प्रशासन द्वारा सार्वजनिक रूप से सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ऐसे सेवा-समर्पित व्यक्तित्वों को प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिन्ह अथवा नागरिक सम्मान प्रदान करना केवल उनका सम्मान नहीं होगा, बल्कि समाज के हजारों अन्य लोगों को भी मानव सेवा के लिए प्रेरित करेगा। जब सेवा करने वालों को समाज और शासन दोनों का सम्मान प्राप्त होता है, तब मानवता की यह श्रृंखला और अधिक सशक्त होती है तथा नई पीढ़ी के सामने अनुकरणीय आदर्श स्थापित होते हैं। आशा है कि शासन-प्रशासन भविष्य में ऐसे सेवा-समर्पित व्यक्तित्वों और संस्थाओं की पहचान कर उन्हें उचित सम्मान प्रदान करने की दिशा में सार्थक पहल करेगा, जिससे समाज में सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना और अधिक प्रबल हो सके।

हम सभी समाज का अभिन्न अंग हैं। इसलिए केवल शासन-प्रशासन ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह अपने आसपास निस्वार्थ भाव से मानव सेवा करने वाले व्यक्तित्वों और संस्थाओं को पहचाने, उनका सम्मान करे तथा उनके प्रेरणादायी कार्यों को समाज के सामने लाए। सम्मान केवल किसी व्यक्ति का नहीं होता, बल्कि उसके माध्यम से सेवा, संवेदना, करुणा और मानवीय मूल्यों का सम्मान होता है। जब समाज अपने सच्चे सेवकों का अभिनंदन करता है, तब नई पीढ़ी के मन में भी सेवा, सहयोग, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरणा का दीप प्रज्ज्वलित होता है। आज आवश्यकता केवल सम्मान करने की नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्वों को समाज का आदर्श बनाने की है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ यह समझ सकें कि जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल पद, प्रतिष्ठा या आर्थिक सफलता नहीं, बल्कि मानवता की निस्वार्थ सेवा भी है।
वास्तव में किसी भी समाज की समृद्धि उसकी इमारतों, संसाधनों या आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि उसके संवेदनशील नागरिकों और सेवा-समर्पित व्यक्तित्वों से मापी जाती है। जो समाज अपने सच्चे सेवकों का सम्मान करना सीख जाता है, वही समाज भविष्य में महान बनता है। ऐसे व्यक्तित्वों का सम्मान केवल उनका सम्मान नहीं, बल्कि मानवता, संस्कार और भारतीय संस्कृति के उन शाश्वत मूल्यों का सम्मान है, जिन पर एक सशक्त, संवेदनशील और आदर्श राष्ट्र की नींव टिकी होती है। यही इस सेवा अभियान का सबसे बड़ा संदेश है।
संकलन कैलाश जैन बरमेचा समाजसेवी





