Tuesday, June 9, 2026

बिहार की सियासत में तेजस्वी का बड़ा बयान: ‘ओबीसी नेतृत्व को खत्म करने की भाजपा की रणनीति’

पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। भारतीय जनता पार्टी के कथित “मिशन” के तहत नीतीश कुमार को सत्ता से बेदखल करने की चर्चाओं के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह ओबीसी नेतृत्व को कमजोर करने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि भाजपा पहले अपने सहयोगी दलों को ही कमजोर करने का काम करती है और बाद में उन्हें राजनीतिक रूप से हाशिये पर धकेल देती है। उन्होंने कई राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा कि मेहबूबा मुफ्ती की पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, महाराष्ट्र में शिवसेना और तमिलनाडु में एआईएडीएमके के साथ भी इसी तरह की राजनीतिक परिस्थितियां पैदा हुईं। अब बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) को निशाने पर लिया जा रहा है।

ओबीसी और दलित नेतृत्व का मुद्दा
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में कहा कि भाजपा देशभर में ओबीसी और दलित नेतृत्व को एक-एक कर कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में भी यही प्रयोग किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी नीतीश कुमार के प्रति राजनीतिक हमदर्दी रखती है और यदि पिछड़े वर्ग के नेतृत्व को बचाने की जरूरत पड़ी, तो वे पीछे नहीं हटेंगे।

जदयू के भीतर संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव का यह बयान सीधे तौर पर जदयू के उस धड़े को संदेश देने की कोशिश है, जो भाजपा की कथित दलित-पिछड़ा विरोधी राजनीति को लेकर असहज माना जाता है।
हालांकि किसी भी राजनीतिक समीकरण के बदलने की संभावना पूरी तरह बिहार विधानसभा के अंकगणित पर निर्भर करती है। मौजूदा परिस्थितियों में यह गणित काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

सियासी तालाब में कंकर
फिलहाल तेजस्वी यादव के बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है। इसे जदयू के राजनीतिक तालाब में फेंके गए उस कंकर की तरह देखा जा रहा है, जिसकी तरंगें आगे चलकर बड़े राजनीतिक प्रभाव का कारण बन सकती हैं।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जदयू और भाजपा के भीतर इस बयान का क्या असर पड़ता है और बिहार की राजनीति किस नई दिशा में आगे बढ़ती है।

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