भिलाई। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिती प्रगतिशील सीमेंट श्रमिक संघ और मेहनतकश आवास अधिकार संघ ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताए की राज्य में विगत 40 वर्षों से मजदूरों, किसानों एवं आम जनता की समस्याओं के समाधान हेतु लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष करते आ रहे हैं। परंतु विगत कुछ वर्षों से परिस्थितियाँ अत्यंत चिंताजनक हो गई हैं। मेहनतकश जनता अपने अस्तित्व की रक्षा तथा जीवन-यापन के लिए निरंतर संघर्ष करने को विवश है।
वर्तमान हालात ऐसे प्रतीत होते हैं मानो श्रमिक वर्ग पुनः शोषण और आर्थिक गुलामी की जंजीरों में जकड़ा जा रहा हो। यह स्थिति हमारे संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों की भावना के प्रतिकूल है। इसलिए आज औद्योगिक क्षेत्र भिलाई के छावनी चौक पर सैकड़ों मजदूर गगन भेदी नारों के साथ प्रदर्शन किया गया सुबह6 बजे से 10 बजे तक प्रदर्शन चला डिवटी जाते हुए मजदूरों से अपील किया गया,सैकडो मजदूर 4 श्रम कानून के विरोध में उतरे,राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन सौंपा गया

निम्न लिखीत मांग को उठाया गया
मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को निरस्त किया जाए।
समाप्त किए गए 44 श्रम कानूनों को श्रमिक हित में संशोधित कर पुनः लागू किया जाए।
आशा, मिड-डे मील, आंगनवाड़ी, ठेका, अनुबंध, आउटसोर्स एवं रसोइया सहित सभी अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी किया जाए।
निर्माण श्रमिकों सहित सभी मजदूरों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन ₹30,000 घोषित किया जाए।
सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर स्थायी भर्ती की जाए तथा बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
वर्ष 2023 के चुनावी घोषणा पत्र में किए गए 57,000 शिक्षकों की भर्ती के वादे को पूर्ण किया जाए।
ड्राफ्ट बिजली बिल संशोधन 2025 को वापस लिया जाए।
सार्वजनिक उपक्रमों एवं संस्थानों का निजीकरण बंद किया जाए।
संबंधित श्रम-विरोधी कानूनों को निरस्त कर मनरेगा मजदूरों को वर्ष में 200 दिन कार्य एवं ₹800 दैनिक मजदूरी की गारंटी दी जाए।
शहर सौंदर्यीकरण के नाम पर गरीब बस्तियों को उजाड़ना बंद किया जाए तथा हॉस्पिटल सेक्टर, अंसुईया नगर, बिजली नगर, खम्हरिया भाठा आदि क्षेत्रों में पट्टा सहित आवास उपलब्ध कराया जाए।

समर्थन मूल्य गारंटी कानून पारित कर धान की बढ़ी हुई राशि ₹189 प्रति क्विंटल का तत्काल भुगतान किया जाए।
श्रमिक-विरोधी ट्रेड डील को रद्द किया जाए।
ए.सी.सी. एवं अडानी सहित सभी सीमेंट संयंत्रों में कार्यरत श्रमिकों को नियमित कर वेज बोर्ड लागू किया जाए।
भिलाई इस्पात संयंत्र के सभी ठेका श्रमिकों को नियमित किया जाए।
छत्तीसगढ़ के बस्तर, हसदेव एवं सरगुजा संभाग में प्रस्तावित खदानों एवं औद्योगिक परियोजनाओं को निरस्त किया जाए।
उपर्युक्त मांगें प्रदेश के लाखों मजदूरों, किसानों एवं मेहनतकश परिवारों के जीवन, सम्मान और भविष्य से जुड़ी हुई हैं।
प्रदर्शन में भुवन साहु,रमाकांत बंजारे,संजना,मोहाल सिंह,कंचन,मन्नु ठाकुर, ब्रम्हा, मोहम्मद अली,बडकु,नीरा,कलादास डेहरिया, महेश साहु,मैरी,आदी सैकड़ों मजदूर सामील थे।




