भिलाई,दुर्ग। प्रदेश में बढ़ती शीतलहर के बीच अनेक गरीब और वंचित परिवार गर्म कपड़ों के अभाव में कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। ऐसी स्थिति में स्थानीय नागरिकों के सहयोग से जरूरतमंदों को राहत पहुँचाने हेतु जन सेवा कार्यक्रम ‘सेवा अभियान – गर्माहट बाँटें’ का आरंभ किया गया है। इस मानवीय प्रयास में नम्रता, प्रदीप यादव, ओजस्वी सक्सेना, रानू ठाकुर, प्रीति साहू, अनीता भारद्वाज और आरती श्रीवास्तव सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य समाज से उपयोग योग्य शॉल, स्वेटर, कंबल, जैकेट आदि गर्म कपड़ों का संग्रह कर उन्हें वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुँचाना है।
यह सेवा कार्य आर्य समाज के नेतृत्व में संचालित है और इसकी प्रेरणा आचार्य डॉ. अजय आर्य द्वारा प्रदान की गई है। अभियान की समन्वयक हेमा सक्सेना संग्रह और वितरण की संपूर्ण व्यवस्था का संचालन कर रही हैं। समाज के नागरिकों से विनम्र आग्रह है कि वे आगे आकर इस मानवतावादी पहल में अपना सहयोग प्रदान करें और ठंड से जूझ रहे परिवारों को राहत पहुँचाने में सहभागी बनें।

हेमा सक्सेना ने बताया कि आम लोगों से और अपरिचित लोगों के लिए सेवा का कार्य करना आत्म संतुष्टि देता है। मुझे आर्य समाज और डॉक्टर अजय आर्य से प्रेरणा मिली है। डॉ अजय आर्य बताया कि बहुत से समाज सेवायों के संपर्क से बहुत सी संस्थाओं अनाथालयों में हमने नए कंबल खरीद कर भिजवाए थे। बहुत से लोग कार्यक्रमों से जुड़ना चाहते हैं कुछ लोगों के पास समय नहीं होता कुछ लोगों के पास सहयोग के सीमित साधन होते हैं। पिछली बार जो हमने अलमारी को साफ करने के लिए कपड़े जमाने शुरू किया तो हमें लगा की बहुत से ऐसे कपड़े हैं जिसको हमने संभाल करके प्रेस करके रखा है और वह हमारे उपयोग में नहीं आ रहे हैं। यहां से हमको यह प्रेरणा मिली कि इस तरह की स्थिति हमारे बहुत सारे मित्रों की होगी जो चीज हमारे पास अतिरिक्त हो गई है जिसे हम उपयोग नहीं करते वह बहुत से लोगों के काम आ सकते हैं। ऐसा करने से हमें संतुष्टि भी मिलती है परोपकार के लिए प्रेरणा भी मिलती है और हमें बहुत कुछ विशेष प्रयत्न नहीं करना पड़ता।

मेरा हमारा हमेशा प्रयत्न रहता है कि हम अपने सीमित संसाधनों से दूसरों के लिए निस्वार्थ काम करें। इस बार हेमा जी ने इस कार्य की बागडोर संभाली मैं उनको धन्यवाद देता हूं। राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रोफेसर चांदनी मरकाम, प्रो. जनेंद्र, प्रो. अलेंद्र जैसे बहुत से सहयोगी इस कार्य में सहयोगी बन रहे हैं। धर्म का बहुत साधारण सा उपदेश है भूखे को भजन दीजिए प्यासे को पानी पिलाइए, ठंड में ठोकने वाले व्यक्ति को गर्म कपड़े दीजिए। धर्म पेचीदा नहीं है। करुणा प्रेम परोपकार और निस्वार्थ भाव ही मनुष्य को मनुष्य बनाते हैं। मैंने गुरुकुल और अपने पूज्य गुरुदेव स्वामी विवेकानंद सरस्वती और आर्य समाज के माध्यम से यही संदेश सीखा है।
संग्रह स्थल – गणपति विहार, फाइव बिल्डिंग, आर्य समाज सेक्टर-6, भिलाई एवं आर्य समाज दुर्ग (निकट अग्रसेन चौक) पर प्रतिदिन दोपहर 2:00 बजे से 5:00 बजे तक गर्म कपड़ों का संग्रह किया जा रहा है। इन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता – डॉ. अजय आर्य: 9300540698 | आ. अंकित शास्त्री: 07999818951
‘सेवा ही सच्ची पूजा है – इस ठंड में किसी के लिए गर्माहट बनें।’




