रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले पर अब सुप्रीम कोर्ट ने शिकंजा कस दिया है। दो साल से लंबित इस घोटाले में टालमटोल पर अदालत ने ईडी और ईओडब्ल्यू को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा —
“जांच अब खत्म होनी चाहिए, और दिसंबर 2025 के अंत तक फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में आ जानी चाहिए — वरना कार्रवाई तय है।”
इस आदेश के बाद दोनों एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। प्रवर्तन निदेशालय और आर्थिक अपराध शाखा ने अब तेज रफ्तार से कार्रवाई शुरू कर दी है। यह मामला अब राजनीतिक भूकंप के केंद्र में पहुंच गया है, क्योंकि इसमें पूर्व मंत्री कवासी लखमा, व्यवसायी अनवर ढेबर, और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल जैसे बड़े नामों की भूमिका की जांच चल रही है।
जस्टिस एम.एम. सुन्दरेश और जस्टिस सतीश चन्द्र शर्मा की बेंच ने 13 याचिकाओं को एक झटके में खारिज करते हुए कहा कि
“यह जांच बिना नतीजे के नहीं रह सकती — अब इसे अंजाम तक पहुंचाना ही होगा।”
इन याचिकाओं में छत्तीसगढ़ और यूपी में दर्ज FIR, ईडी की ECIR, और IAS अधिकारी अनिल टुटेजा की जमानत याचिका भी शामिल थीं।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश आते ही ईडी और ईओडब्ल्यू ने फाइलें खोल दी हैं और पूछताछ की रफ्तार दोगुनी कर दी है।
अब तक आबकारी विभाग के 30 से ज्यादा अफसरों से पूछताछ हो चुकी है, जिनमें 7 रिटायर्ड अधिकारी भी हैं।
ईडी के वकील सौरभ पांडे ने दो टूक कहा —
“अब यह जांच किसी कीमत पर अधूरी नहीं रहेगी। फाइनल रिपोर्ट समय सीमा के भीतर पेश की जाएगी।”
छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में से एक माने जाने वाले इस केस में अब सत्ता के गलियारों में खलबली मच गई है।
सुप्रीम कोर्ट का अल्टीमेटम साफ है — दिसंबर तक सच सामने आना ही होगा!



