भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र के डिप्लोमा इंजीनियर्स का प्रमुख संगठन डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ भिलाई (DEAB) इन दिनों गहरे संगठनात्मक संकट से गुजर रहा है। हाल ही में इंजीनियर्स डे पर हुए सफल समारोह के बाद अब संगठन में चुनावी प्रक्रिया, पारदर्शिता और आपसी मतभेदों को लेकर जबरदस्त विवाद छिड़ गया है।
चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवाल
इंजीनियर्स डे से पहले DEAB ने नई कार्यकारिणी गठन की घोषणा की थी, लेकिन कई सदस्यों ने चुनाव की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।
सदस्यों का कहना है कि चुनाव की सूचना केवल एक सप्ताह पहले जारी की गई, जबकि बायलॉज के अनुसार चार सप्ताह पहले सूचना देना आवश्यक है।
इसी मुद्दे को लेकर संगठन के भीतर असंतोष बढ़ा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन के आरोप लगने लगे।
मीटिंग में विवाद और वरिष्ठ उपाध्यक्ष का इस्तीफा
विवाद तब और भड़क गया जब एक कार्यकारिणी बैठक में शब्दों की मर्यादा टूटने और गाली-गलौज की घटना सामने आई।
सदस्यों ने इस घटना को संगठन की गरिमा के विपरीत बताया।
इसके बाद संगठन को बड़ा झटका तब लगा जब वरिष्ठ उपाध्यक्ष पवन साहू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने कहा—
“DEAB का चुनाव ऑफिसर्स एसोसिएशन की तरह वोटिंग के माध्यम से होना चाहिए। वर्तमान कार्यकारिणी विवादित है, इसे भंग कर ओपन चुनाव कराया जाना ही संगठन के हित में है।”

संगठन सचिव अजय तामुरिया ने एकता पर दिया संदेश
संगठन सचिव अजय तामुरिया ने अपने संदेशों में बार-बार यह कहा कि “DEAB डिप्लोमा इंजीनियर्स की मातृ संस्था है और इसे गुटबाजी से बचाना सभी की जिम्मेदारी है।”
उन्होंने आमसभा बुलाने की बात स्वीकार की, लेकिन इसके साथ संगठन की एकता और अनुशासन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
अध्यक्ष ने भी दिया इस्तीफा
विवाद बढ़ने के बाद DEAB अध्यक्ष ने शुरुआत में पवन साहू का इस्तीफा अस्वीकार करते हुए कहा था कि
“गुस्से में लिया गया निर्णय सही नहीं है, संगठन को एकजुट रहना चाहिए।”
हालांकि, घटनाक्रम तेजी से बदलता गया और अंततः अध्यक्ष ने भी अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी।
इससे संगठन में नेतृत्व शून्य की स्थिति बन गई है।
आमसभा और ओपन चुनाव की मांग तेज़
अब कई सदस्यों ने मांग की है कि संगठन की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बहाल करने के लिए आमसभा बुलाई जाए और ओपन वोटिंग से चुनाव कराया जाए।
कार्यकारी अध्यक्ष घनश्याम साहू ने भी कहा है कि आगे का फैसला सिर्फ 600 सदस्यों की उपस्थिति में आमसभा में ही लिया जाना चाहिए।
संगठन की साख दांव पर
भिलाई इस्पात संयंत्र के डिप्लोमा इंजीनियर्स का यह संगठन वर्षों से तकनीकी कर्मचारियों की आवाज़ रहा है। लेकिन वर्तमान विवादों ने इसकी एकता और साख दोनों पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या DEAB नई पारदर्शी कार्यप्रणाली के साथ फिर एकजुट हो पाएगा।





