सूर्योपासना का पर्व छठ: बिहार की संस्कृति से विश्व की धरोहर तक का सफर..
छठ महापर्व: बिहार से निकलकर पूरी दुनिया में बिखेर रहा आस्था का प्रकाश..
प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर छठ पर्व को मिलेगा यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा..
पटना / ( संदीप सिंह ) : लोक आस्था का अद्भुत पर्व छठ पूजा अब नजदीक है। बिहार की पवित्र धरती से प्रारंभ हुआ यह पर्व आज पूरे भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर में बसे भारतीय समुदाय की आस्था और संस्कृति का प्रतीक बन चुका है।
छठ महापर्व में सूर्योपासना और छठी मैया की आराधना की जाती है। व्रतियों द्वारा कठोर नियमों का पालन करते हुए डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने का दृश्य भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा और आस्था का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करता है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस लोक आस्था के महापर्व को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र सरकार के प्रयासों से अब छठ महापर्व को यूनेस्को (UNESCO) की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
📖 यूनेस्को (UNESCO), संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी है, जिसकी स्थापना 1945 में हुई थी। इसका उद्देश्य शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और शांति को बढ़ावा देना है। यदि छठ पूजा को यूनेस्को की धरोहर सूची में शामिल किया जाता है तो यह भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों को संरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
आस्था, संयम और शुद्धता का यह पर्व अब बिहार से निकलकर वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति की ध्वजवाहक परंपरा के रूप में स्थापित होने जा रहा है।




