हर सुबह उठते ही किसी लक्ष्य की ओर उत्साहित ना हो तो आप जी नही रहे सिर्फ जीवन काट रहे हैं
भिलाई,दुर्ग। यकीन नहीं होता संतोष भाई आप यूं ही छोड़ कर चले जाओगे पर्यावरण के प्रति गंभीर हमेशा पर्यावरण के लिए बढ़-चढ़कर काम किया कुछ अलग कर गुजरने की इच्छा, फुटबॉल खेलने के प्रति गंभीर समाचार पढ़ने में इतना रोचक रहता उनके शब्द धधकती हुई रातें, रूह कांप देने वाली ऐसे शब्दों का उपयोग वे कलम से किया।

इतना पुराना संबंध इतने हंसमुख मिलनसार मुझे याद है कि लगभग 25 साल पहले आपकी कार लाल कलर मारुति कार में पवन केसवानी मैं और आप तीनों आपने 30 हजार में खरीदा था और उसमें बैठकर मस्ती करते हुए खूब घूमते थे। हमेशा पत्रकारिता में एक अलग तरह का समाचार बनाना रोचक बनाना आप कि खासियत थी। मैंने एक दिन मजाक में कहा आपकी धधकती वाली समाचार बहुत दिन हो गया पढ़ी नहीं मैंने फिर उन्होंने दुर्ग जाकर एक प्यारी बालिका के मर्डर का समाचार जो आज तक नहीं सुलझा बनाया। हमेशा हंसमुख रहना कभी उदास नहीं दिखे इतना स्वस्थ शरीर रहा पता नहीं कैसे प्रभु की क्या इच्छा ?