शिक्षकों की अनूठी पहल: अपने व्यय से लगातार सातवीं बार करा रहे सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता

00 खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के शिक्षकों की पहल बनी बच्चों के ज्ञान-विकास का सशक्त माध्यम,

खैरागढ़ : शिक्षा केवल कक्षा की चारदीवारी तक सीमित नहीं है।। बच्चों में पढ़ने, समझने, सोचने और प्रतियोगी भावना विकसित करने के लिए शिक्षकों द्वारा किए जाने वाले नवाचार भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।। इसी सोच को साकार कर रहे हैं जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के शिक्षक, जो वर्ष 2020-21 से लगातार सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन करते आ रहे हैं।।
जिला स्तरीय सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजन समिति द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता अपने आप में एक अनूठी पहल है
खास बात यह है कि इस आयोजन से जुड़े सभी सदस्य शिक्षक हैं और प्रतियोगिता के संचालन एवं आयोजन में अपना समय, श्रम और आर्थिक सहयोग स्वयं देते हैं। यही कारण है कि यह पहल शिक्षकों की सामाजिक एवं शैक्षणिक प्रतिबद्धता का उदाहरण बनकर सामने आई है।।

संभवतः छत्तीसगढ़ का अनूठा उदाहरण
छत्तीसगढ़ में शिक्षकों द्वारा अपने व्यय और सामूहिक प्रयास से इतने व्यापक स्तर पर लगातार सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित किए जाने का यह संभवतः एक अनूठा उदाहरण है।। प्रतियोगिता में जिले के शासकीय एवं निजी विद्यालयों के प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक तथा हाई/हायर सेकेंडरी स्तर के विद्यार्थी भाग लेते हैं।। विद्यार्थियों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता, जिससे सभी वर्गों के बच्चों को समान अवसर के साथ प्रतियोगिता में शामिल होने का अवसर मिलता है।।
इस आयोजन की विशेष बात यह भी है कि परीक्षा केंद्रों पर केंद्राध्यक्ष और पर्यवेक्षक के रूप में जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षक भी इसके लिए किसी प्रकार का मानदेय नहीं लेते।।

शिक्षक अपनी नियमित जिम्मेदारियों के अतिरिक्त समय निकालकर परीक्षा व्यवस्था संभालते हैं
इसे बच्चों के हित में अपनी सेवा का हिस्सा मानते हैं।। इस प्रकार प्रश्न निर्माण से लेकर परीक्षा संचालन तक पूरी प्रक्रिया में शिक्षकों का योगदान स्वैच्छिक और सेवाभावी भावना से जुड़ा हुआ है।।
पाठ्यपुस्तक आधारित प्रश्न, इसलिए पढ़ाई को मिलता है लाभ
इस प्रतियोगिता की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि बच्चों से पूछे जाने वाले प्रश्न उनकी निर्धारित पाठ्यपुस्तकों पर आधारित होते हैं।। इसका उद्देश्य केवल बच्चों का सामान्य ज्ञान बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी पाठ्यपुस्तकों को ध्यानपूर्वक पढ़ने के लिए प्रेरित करना भी है।। इससे प्रतियोगिता की तैयारी करते हुए विद्यार्थी अपने पाठ्यक्रम की पुस्तकों को बार-बार पढ़ते हैं, महत्वपूर्ण तथ्यों को समझते हैं और विषयों को याद रखने के साथ-साथ उनके प्रति रुचि भी विकसित करते हैं।। इस तरह प्रतियोगिता की तैयारी बच्चों की नियमित पढ़ाई और शैक्षणिक उपलब्धि में भी सहायक बनती है।।

शिक्षकों का समय, श्रम और संसाधन बच्चों के भविष्य के नाम
इस पूरी पहल की सबसे बड़ी ताकत कोई सरकारी बजट या व्यावसायिक उद्देश्य नहीं, बल्कि शिक्षकों की सामूहिक इच्छा और बच्चों के प्रति उनकी जिम्मेदारी है। प्रश्न तैयार करने से लेकर पाठ्यक्रम निर्धारित करने, पंजीयन, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, प्रश्नपत्र, OMR, मूल्यांकन, परिणाम और पुरस्कार वितरण तक अनेक कार्यों में शिक्षक अपना समय और श्रम देते हैं।।
वर्ष 2020-21 में शुरू हुई यह प्रतियोगिता अब सातवें संस्करण में प्रवेश कर चुकी है। लगातार इतने वर्षों तक किसी शैक्षणिक गतिविधि को चलाए रखना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।।यह प्रतियोगिता आज केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि जिले के शिक्षकों के सामूहिक समर्पण और विद्यार्थियों के ज्ञान-विकास का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है।।

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