विज्ञान जीवन की समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए प्रेरित करता है पी बी एस उषा
दुर्ग। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय दुर्ग में राज्यस्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी 2025 का उद्घाटन समारोह आयोजन उत्साह और नवाचार से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। केंद्रीय विद्यालय संगठन, रायपुर संभाग की वरिष्ठ अधिकारी पी.बी.एस. उषा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं और प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सीआत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत” थीम पर आधारित इस आयोजन में प्रदेश के 33 से अधिक केंद्रीय विद्यालयों के 179 विद्यार्थी 39 शिक्षकों के साथ सहभागी बने। रंगारंग स्वागत गीत और आकर्षक भरतनाट्यम नृत्य ने पूरे समारोह को ऊर्जावान शुरुआत प्रदान की।
प्राचार्य उमाशंकर मिश्र ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्रीय विद्यालय विद्यार्थियों की वैज्ञानिक दृष्टि, तर्क क्षमता और नवाचारी सोच के विकास का सशक्त केंद्र है। कार्यक्रम का संचालन बिंदु शिवराजन और डॉ. अजय आर्य ने किया। अपने संबोधन में डॉ. अजय आर्य ने विज्ञान की उपयोगिता पर जोर देते हुए कहा – विज्ञान इंसानी जीवन को बेमिसाल बनाता है ज्ञान का दायरा विशाल बनाता है। नवाचार प्रगति की नई है विज्ञान विज्ञान ही जीवन को आसान बनाता है।

प्रदर्शनी में सात प्रमुख विषयों सतत कृषि, कचरा प्रबंधन एवं प्लास्टिक के विकल्प, उभरती प्रौद्योगिकियाँ, हरित ऊर्जा, जल संरक्षण एवं प्रबंधन, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता तथा मनोरंजक गणितीय मॉडलिंग पर आधारित कक्षों का सृजन किया गया, जिनमें विद्यार्थियों के सहज, गंभीर और अभिनव मॉडलों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। थीम-वार कक्षों की तैयारी अलग-अलग कक्ष में विद्यार्थियों द्वारा की गई, जिन्होंने वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान पर आधारित अनुप्रयोगों का प्रभावी प्रदर्शन किया।
मुख्य अतिथि पी.बी.एस. उषा ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता एवं वैज्ञानिक सोच की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रदर्शनियाँ आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण होती हैं। उन्होंने प्रदर्शनी में प्रस्तुत मॉडलों को भविष्य की प्रगति का आधार बताते हुए सभी छात्रों और शिक्षकों को शुभकामनाएँ दीं। मुख्य अतिथि ने छात्रों को तकनीक का उपयोग करते हुए और इसको भविष्य में जन-जन तक अपने विचारों और अपने प्रोजेक्ट को पहुंचाने के लिए अनेक सुझाव प्रदान किया। कौन है कुछ अन्य समस्याओं की ओर भी सोने के लिए छात्रों को प्रेरित किया कि इन क्षेत्रों में इन समस्याओं का समाधान ढूंढा जाना चाहिए।
प्रदर्शनी में कृषि-आधारित मॉडलों की श्रृंखला ने विशेष रुचि प्राप्त की, जिनमें खेत की बाउंड्री वॉल और मचान में लगाए गए सुरक्षा सेंसर तथा एक विद्यार्थी द्वारा निर्मित ‘फार्मर स्टिक’ प्रमुख रही, जिसमें लाइट, वाइब्रेशन और सेंसर जैसे फीचर शामिल थे। दिव्यांग श्रेणी की छात्रा योशिता द्वारा गैस रिसाव रोकने के लिए तैयार किया गया ऑटोमेटिक सुरक्षा मॉडल प्रदर्शनी का केंद्रबिंदु रहा। गैस रिसाव की स्थिति में स्वतः एग्जॉस्ट चालू होने और बिजली कटने की तकनीक सभी के लिए प्रेरणादायक रही।
इस आयोजन की सफलता के पीछे शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मुख्य प्रभारी एस.के. राय ने प्रदर्शनी की संपूर्ण रूपरेखा साझा की। एस.के. चतुर्वेदी, बी.के., वी.के. यादव, गीता माली और राजेश कुमार सहित सभी शिक्षकों ने विद्यार्थियों को उत्कृष्ट मार्गदर्शन प्रदान किया। अंत में उप-प्राचार्या पुष्पा बड़ा ने सभी अतिथियों, सहयोगियों और विद्यार्थियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद प्रस्ताव रखा।
यह राज्यस्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी न केवल विद्यार्थियों की प्रतिभा, जिज्ञासा और नवाचार क्षमता का परिचय रही, बल्कि यह आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में युवा मस्तिष्कों की वैज्ञानिक उड़ान का सशक्त प्रतीक भी बनी।