आरक्षक भर्ती में मनमानी का बड़ा आरोप, दुर्ग–बेमेतरा–बालोद के अभ्यर्थियों ने कहा— “न्याय के लिए हाई कोर्ट पहुँचे हैं”

दुर्ग/बेमेतरा/बालोद। छत्तीसगढ़ में हाल ही में जारी हुई आरक्षक भर्ती सूची पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दुर्ग, बेमेतरा और बालोद जिलों के अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर मनमानी और गड़बड़ी का आरोप लगाया है। युवाओं का कहना है कि कम अंक लाने वाले उम्मीदवारों को चयनित कर लिया गया, जबकि अच्छे नंबर लाने वाले योग्य अभ्यर्थियों को लिस्ट से बाहर कर दिया गया है।

अभ्यर्थियों के अनुसार, लिखित परीक्षा के वास्तविक अंकों और चयन सूची में दर्शाए गए अंकों के मिलान में गंभीर विसंगतियाँ सामने आई हैं। कुछ युवाओं ने बताया कि उनके 70–80 तक अंक आने के बावजूद उनका चयन नहीं हुआ, जबकि लगभग 45–50 अंक वालों को चयन सूची में जगह मिल गई है।

गंभीर आरोपों के बीच अभ्यर्थी हाई कोर्ट पहुँचे

उनका कहना है कि भर्ती बोर्ड ने न केवल मार्क्स वेरिफिकेशन में गलती की है, बल्कि कई मामलों में पक्षपात और गलत तरीके से नाम जोड़ने जैसे आरोप भी सामने आ रहे हैं।
इन्हीं गड़बड़ियों के खिलाफ दुर्ग, बेमेतरा और बालोद जिलों के अभ्यर्थी अब एकजुट होकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुँच गए हैं।
याचिका में उन्होंने मांग की है कि
पूरी भर्ती प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए

मेरिट सूची का पुनःनिर्माण किया जाए

जिन उम्मीदवारों के अंक में अंतर पाया गया है, उनके मामले की विशेष जांच की जाए
युवाओं ने कहा कि यह मामला केवल एक जिले का नहीं, बल्कि तीनों जिलों के सैकड़ों अभ्यर्थियों की मेहनत और भविष्य से जुड़ा है।
“हम न्याय के लिए आए हैं”— अभ्यर्थियों की भावनाएँ

हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने पहुंचे एक अभ्यर्थी ने कहना
“हमने मेहनत करके अच्छे अंक हासिल किए, लेकिन चयन नहीं हुआ। कम नंबर वालों का चयन कैसे हो गया? यह सरासर अन्याय है। इसलिए हम यहाँ न्याय की उम्मीद लेकर आए हैं।”

दूसरे अभ्यर्थी ने कहा कि यह केवल गलतियां नहीं, बल्कि सुनियोजित लापरवाही और मनमानी लगती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले की सही जांच नहीं हुई, तो आंदोलन भी किया जाएगा।

भर्ती बोर्ड ने दी प्रतिक्रिया

मामला हाई कोर्ट पहुँचने के बाद भर्ती बोर्ड ने कहा है कि जिन अभ्यर्थियों ने शिकायतें दर्ज की हैं, उनकी आपत्तियों की प्राथमिक जांच शुरू की गई है।
हालाँकि अभ्यर्थियों का मानना है कि केवल प्राथमिक जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले का पारदर्शी ऑडिट जरूरी है।
युवाओं की उम्मीद— न्याय और पारदर्शी भर्ती

अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका एक ही मकसद है—
“योग्य को न्याय मिले और भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी बने।”

तीनों जिलों के सैकड़ों उम्मीदवार अब हाई कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा।

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