जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र में राष्ट्र-स्तरीय नियोनेटल रीससिटेशन कार्यशाला संपन्न

भिलाई। नवजात मृत्यु दर को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र (जेएलएंएच & आरसी) ने हाल ही में एक राष्ट्र-स्तरीय नवजात पुनः जीवन प्रक्रिया (नियोनेटल रीससिटेशन) कार्यशाला का आयोजन किया। बाल चिकित्सा और नवजात विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य प्रसव कक्ष में तत्परता को बढ़ाना और जन्म के बाद के महत्वपूर्ण “गोल्डन मिनट” में नवजात की देखभाल में सुधार लाना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी, ने किया, जबकि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. उदय कुमार, एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में यह कार्यशाला संपन्न हुई।

यह पहल राष्ट्रीय स्वास्थ्य लक्ष्यों के अनुरूप है, व विशेष रूप से राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा निर्धारित उद्देश्यों के तारतम्य में है। एनएफएचएस-5 के अनुसार, छत्तीसगढ़ में शिशु मृत्यु दर (आईएम्आर) 1,000 जीवित जन्मों में 44 के दर से रिपोर्ट की जाती है, और इनमें से एक बड़ी संख्या नवजात अवस्था में मृत्यु का शिकार होती है। समय पर नवजात पुनः जीवन प्रक्रिया को लागू करना एक महत्वपूर्ण उपाय है, जो प्रारंभिक नवजात मृत्यु दर को कम करने में सहायक है, अतः ऐसे कार्यशालाओं की आवश्यकता राज्य के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

इस कार्यशाला में देश भर के प्रमुख विशेषज्ञों ने नवजात देखभाल के क्षेत्र में अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की। इनमें चिकित्सा निदेशक, स्पर्श शिशु चिकित्सालय, डॉ. ए.पी. सावंत, वरिष्ठ सलाहकार, नियोनेटल यूनिट, जेएलएंएच & आरसी, डॉ. माला चौधरी, एवं सहायक प्राध्यापक, सिम्स मेडिकल कॉलेज, डॉ. अतिंद्र जैन शामिल थे। इन विशेषज्ञों ने नवजात के जोखिम कारकों की पहचान करने और नवजात पुनः जीवन प्रक्रिया (एनआरपी) प्रोटोकॉल को लागू करने पर आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल प्रस्तुत किए, तथा विशेष रूप से उचित वेंटिलेशन की स्थापना पर जोर दिया।

कार्यशाला में कुल 24 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिन्होंने आईएपी-एनआरपी-एफजीएम पोर्टल के माध्यम से अनिवार्य ऑनलाइन प्रशिक्षण मॉड्यूल पूरा किया था। इसके उपरान्त उन्हें नियोनेटल रीससिटेशन प्रक्रिया तकनीकों पर प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया, जिससे उनके कौशल को और अधिक सुदृढ़ किया गया।

यह कार्यशाला भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे भारत नवजात क्रिया योजना (आईएनएपी) का एक अभिन्न अंग है, जिसका उद्देश्य 2030 तक भारत की नवजात मृत्यु दर को एकल अंकों में लाना है। आईएनएपी स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण को सुधारने की आवश्यकता पर जोर देता है और यह सुनिश्चित करता है कि देश के प्रत्येक प्रसव केंद्र में कम से कम एक प्रशिक्षित नवजात पुनः जीवन प्रक्रिया प्रदाता मौजूद हो। यह कार्यशाला सुविधा आधारित नवजात देखभाल (एफबीएनसी) रणनीति के साथ भी संरेखित है।
इस कार्यशाला के सफल आयोजन में चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं, प्रमुख डॉ. विनीता द्विवेदी; मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र ठाकुर, एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उदय कुमार, का मार्गदर्शन व सहायक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सम्बिता पांडा; सहायक मुख्य चिकित्सा अधिकारी और नियोनेटल विभाग प्रभारी, डॉ. एस.के. साहा, ; महाप्रबंधक शाहिद अहमद, उप-प्रबंधक (नर्सिंग प्रशासन) शाइला एस. अब्राहम, एवं , सहायक प्रबंधक, आपातकालीन सेवाएं, सुश्री लता मिश्रा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

Exit mobile version