भिलाई: साइबर फ्रॉड के म्यूल अकाउंट मामले में 8 आरोपियों गिरफ्तार, 1.20 करोड़ रुपये का अवैध लेन-देन हुआ उजागर…

भिलाई। बंधन बैंक, नेहरू नगर शाखा में म्यूल अकाउंट खोलकर साइबर फ्रॉड के जरिए 1 करोड़ 20 लाख 57 हजार 549 रुपये के अवैध लेन-देन के मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले की जानकारी भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित “समन्वय” पोर्टल से प्राप्त हुई, जिसके आधार पर पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की। जांच में यह खुलासा हुआ कि कुल 27 बैंक खाते इस घोटाले में शामिल थे और इन खातों का उपयोग साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को व्यय करने, उपयोग करने और संवर्धन करने के लिए किया गया।

सुपेला थाना में अपराध क्रमांक 1322/2025 के तहत धारा 317(2), 318(4), 3(5) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान यह पाया गया कि संबंधित म्यूल अकाउंट धारकों ने साइबर फ्रॉड से प्राप्त रकम का अवैध उपयोग किया और इससे संबंधित कई ट्रांजैक्शन किए। पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं: रनजीत महानंद, परमीला बाई, के. आकाश राव, विपिन कुमार सिरसाम, मानवी बेरी, आशीष गुप्ता, पिंकी कुर्रे और आठवें आरोपी की जानकारी अभी पुलिस गोपनीय रख रही है। पुलिस ने बताया कि अन्य म्यूल अकाउंट धारकों की खोज जारी है और जल्द ही उन्हें भी हिरासत में लिया जाएगा।

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति को अपने बैंक खाते का उपयोग करने की अनुमति न दें। थोड़े से लाभ के लालच में अपने खाते में साइबर फ्रॉड से संबंधित रकम का लेन-देन करने से बचें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने बताया कि इस तरह के अपराधों की रोकथाम और जांच के लिए सतत निगरानी की जा रही है।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से संबंधित दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और मोबाइल फोन भी बरामद किए। अधिकारियों ने बताया कि साइबर फ्रॉड के मामलों में आम नागरिकों को सतर्क रहना अत्यंत आवश्यक है और संदिग्ध लेन-देन की तुरंत सूचना स्थानीय साइबर थाना या पुलिस हेल्पलाइन पर दें।

इस सफलता से यह संदेश गया कि साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस सतर्क और सक्रिय है। पुलिस ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल अपराधियों को सजा मिलेगी, बल्कि आम जनता को भी साइबर धोखाधड़ी से बचने की सीख मिलेगी।

साइबर पुलिस की इस कार्रवाई के बाद जिले के नागरिकों में जागरूकता बढ़ी है और यह साबित हुआ कि तकनीकी और डिजिटल अपराधों के मामलों में पुलिस की तत्परता और प्रभावी कार्रवाई से अपराधियों को पकड़ा जा सकता है।

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