0 अपेक्स बैंक को खरीदी का जिम्मा से प्रदेशभर में जिलो से विरोध
0 भाजपा समर्थित अध्यक्षों ने ही खोला मोर्चा, उठ रहे सवाल
राजनांदगांव। धान खरीदी के लिए जिला सहकारी केन्दि्य बैंक के अधीन आने वाले समितियों को तिरपाल, कैप कव्हर और सुतली सहित सीसीटीव्ही कैमरे जैसे संसाधन खरीदने का अधिकार है। लेकिन इस बार पूरा काम अपेक्स बैंक को दिए जाने से प्रदेशभर में बवाल मच गया है। खरीदी के लिए उपयोग होने वाले सामग्रियों की खरीदी जेम पोर्टल में करने के बजाय अपेक्स बैंक द्वारा प्रदेशभर के समितियों के लिए खुद ही खरीदी कर रही है। यह पूरा खेल गुजरात की एक कंपनी को लाभ पहुंचाने का है, जिसके आड़ में कमीशनखोरी भी सामने आ रही है। इसका विरोध प्रदेशभर के पांच जिला सहकारी केन्दि्य बैंको ने कर दिया है।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की तैयारी जोरों पर है। 3160 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 2573 सहकारी समितियां धान खरीदी करेंगी। धान उपार्जन हेतु सहकारिता आयुक्त के एक आदेश से समिति और जिला बैंकों की नाराजगी बढ़ गई है। सभी जिला सहकारी बैंकों के अध्यक्षों और समितियों ने पंजीयक को पत्र लिखकर कड़ा विरोध जताया है। दरअसल इस वर्ष प्रदेश के सभी 3160 धान उपार्जन केंद्रों के लिए तिरपाल, पॉलीथिन कैप कवर, सीसीटीवी कैमरा आदि की खरीदी अपेक्स बैंक कर रहा है। इस केंद्रीयकृत व्यवस्था का जिला बैंक और पैक्स समितियां विरोध कर रही हैं। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि समितियां स्वायत्त संस्थाएं हैं। उनके ऊपर अपेक्स बैंक को थोपना तानाशाही है। वे स्वयं शासन के भंडार क्रय नियमों के अनुसार आवश्यकता के अनुरूप तिरपाल समेत अन्य सामग्री की खरीदी स्थानीय स्तर पर करती रही हैं। नए नियम में अपेक्स बैंक सीधे सभी समितियों में वेंडर भेजकर तिरपाल समेत अन्य सामग्री सप्लाई करवाएगा और समितियां उसका भुगतान करेंगी।
दुर्ग जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन कहा कि हम सभी 6 जिला बैंकों के अध्यक्षों ने निर्णय लिया है कि, हमारी पैक्स समितियों की स्वायत्तता पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए। वे बैंकों के दबाव के बिना स्वतंत्र रूप से कार्य करें। उनकी अपनी लोकल बॉडी है। छत्तीसगढ़ सरकार के भंडार-क्रय नियमों के तहत अपनी जरूरतों के अनुसार वे स्वयं तिरपाल समेत सभी सामग्री क्रय करें। अपेक्स बैंक से सभी 2573 सोसायटियों के लिए तिरपाल आदि की हर साल खरीदी से उन्हें नुकसान होगा क्योंकि तिरपाल एक बार खरीदने से वे तीन-तीन साल तक चलते हैं।
0 भाजपा समर्थित अध्यक्षें ने भी खोला मोर्चा
बेलचंदन ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर अपेक्स बैंक के किस नेता को लाभ पहुंचाने के लिए 2573 समितियों का यह अधिकार छीना जा रहा है? हम लोगों ने रजिस्ट्रार से मांग की है कि अपेक्स बैंक को स्वयंभू न बनाकर सभी पैक्स समितियों की स्वायत्तता बरकरार रखें। पिछली सरकार में यह होता था कि सूतली व गेरू तक के सप्लायर्स बैंक चेयरमैन व सीईओ तय करते थे। वहीं ढर्रा अब अपेक्स बैंक चलाना चाहता है। जो कि अब चलने वाला नहीं है। पता चला है कि रजिस्ट्रार सहकारी संस्थाएं के आदेश पर अपेक्स बैंक प्रदेश के सभी 3160 धान खरीदी केंद्रों एवं 2573 पैक समितियों के लिए तिरपाल आदि की खरीदी के लिए टेंडर जारी करने की तैयारी कर रहा है। पहले बारिश से धान को बचाने के लिए समितियां स्थानीय स्तर पर आवश्यकतानुसार तिरपाल आदि की व्यवस्था खुद करती थीं। वे पूर्व की व्यवस्था ही चाह रही हैं। उनका कहना है कि वे शासन के भंडार क्रय नियमों के अनुसार जेम्स के माध्यम से भी तिरपाल व अन्य सामग्री खरीदने को तैयार है।
0 ट्रांसपोर्टिंग का भी बड़ा खेल
धान खरीदी के लिए पूरा संसाधन को गलत तरीके से केन्दि्यकरण किए जाने के चलते ट्रांसपोर्टिंग का भी बड़ा खेल होगा। क्योकि लोकल स्तर पर अगर समितियां खरीदी करती तो ट्रांसपोर्टिंग का खर्च बचता, लेकिन अपेक्स बैंक की सप्लाई से शासन को खजाने से बड़ा नुकसान होगा। बस्तर जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष दिनेश कश्यप ने बताया कि, बस्तर संभाग के अनेक धान खरीदी केंद्र दुर्गम क्षेत्रों में है, जहां पर राजधानी से समय पर तिरपाल पहुंचा पाना संभव नहीं लग रहा है। निर्माता और उनके अधिकृत विक्रेता की शर्तों के कारण स्थानीय व्यापारी तिरपाल की आपूर्ति से बाहर हो जाएंगे। समितियां पहले स्थानीय स्तर पर आसानी से तिरपाल की व्यवस्था कर लेती थी। अत्यधिक वर्षा होने व प्राकृतिक आपदा पर समितियाँ आपातकालीन परिस्थितियों में भी तिरपाल, कैप कवर व इलेक्ट्रॉनिक आइटमों की तत्काल व्यवस्था कर लेती थी अब टेंडर पर निर्भर होने से समय पर उपलब्धता में दिक्कत आएगी। सहकारिता आयुक्त एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं रमेश शर्मा का कहना है कि मेरे समय में इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। अपेक्स बैंक के द्वारा केंद्रीयकृत खरीदी का 6 जिला सहकारी बैंकों के अध्यक्षों एवं पैक्स समितियों ने आपको पत्र लिखकर विरोध जताया है, पर उन्होंने कहा कि वे दिखवा लेंगे कि समितियाँ क्या चाह रही हैं।
