दुर्ग। न्याय व्यवस्था के मानवीय पक्ष को प्रमुखता देते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश/संरक्षक रमेश सिन्हा ने माह जुलाई 2025 में बाल गृह और बाल संप्रेक्षण गृह में रह रहे शारीरिक और मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के विकास के लिए बड़ी पहल करते हुए विभिन्न न्यायालयीन प्रकरणों में 11 सितंबर 2024 से 11 जुलाई 2025 तक की अवधि के लिए वसूली गई अर्थदण्ड कुल 4 लाख 2 हजार रुपये की राशि बच्चों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, खेल सामग्री, शिक्षाप्रद पुस्तकें और मानसिक विकास से जुड़ी गतिविधियों के उपयोग के लिए इन बच्चों की देखरेख करने वाली संस्थाओं के पास जमा कराने के आदेश दिए थे।
इसी प्रेरणा से प्रेरित होकर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित नालसा (बालकों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं और उनके संरक्षण के लिए विधिक सेवाएं) योजना, 2015 के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा मानवता एवं न्याय के संवैधानिक मूल्यों को साकार करते हुए एक निर्धन एवं जरूरतमंद बालक को संदीपनी बालक छात्रावास फरीद नगर भिलाई, जिला-दुर्ग (छ०ग०) एवं उसी परिसर में स्थित शासकीय विद्यालय में प्रवेश दिलाने में अहम भूमिका निभाई गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्कल नगर दुर्ग, जिला दुर्ग (छ०ग०) निवासी 06 वर्षीय बालक की माता का देहांत हो जाने के कारण बच्चे के पालन पोषण की जिम्मेदारी उसके पिता पर आ गयी थी। बच्चे का पिता मजदूरी कर अपने बच्चे का पालन-पोषण कर रहा था। मजदूरी करने के कारण पिता अपने बच्चे पर ध्यान नहीं दे पाता था, जिसके चलते बच्चा बुरी संगति में आ गया था, जिसके कारण बच्चे की मनोदशा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। बच्चे की शिक्षा एवं उसके सुरक्षित तथा उज्जवल भविष्य को सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से उसका प्रवेश विद्यालय एवं छात्रावास में कराया जाना अत्यावश्यक था।
इसकी जानकारी प्राप्त होते ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग ने तत्परता से कार्यवाही करते हुए संबंधित विद्यालय एवं छात्रावास अधीक्षक से समन्वय स्थापित किया। आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति कर बालक को विधि एवं नियमानुसार विद्यालय एवं छात्रावास में प्रवेश दिलवाया गया। इस सराहनीय पहल से न केवल एक बालक की शिक्षा सुनिश्चित हुई, बल्कि विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग की समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदना भी उजागर हुई है। उक्त सकारात्मक प्रयास से शिक्षा हेतु चलाए जा रहे विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के उद्देश्यों के विफल होने की संभावना को भी समाप्त किया गया। इस संपूर्ण प्रक्रिया में थाना सिटी कोतवाली के पैरालीगल वालेंटियर की प्रमुख भूमिका रही।




