‘मोदी की गारंटी’ को अरुण वोरा ने बताया चुनावी जुमला, 11 दिनों से जारी महाआंदोलन से शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त!

दुर्ग/ वादाखिलाफी और उपेक्षा से आक्रोशित प्रदेशभर के अतिथि शिक्षक अपनी जायज मांगों को लेकर पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। सरकार को सीधे आड़े हाथों लेते हुए पूर्व विधायक अरुण वोरा ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र को “मोदी की गारंटी” बताकर जनता से वादे किए थे, लेकिन सरकार बनने के बाद उन वादों को पूरा करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। घोषणा पत्र के अनुसार सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर अतिथि, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए समिति का गठन होना था, लेकिन आज तक यह वादा अधूरा है।

बरसों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों का कहना है कि उन्हें वर्षों से केवल आश्वासन ही मिला है। नियमितीकरण और सम्मानजनक भविष्य की मांग को लेकर वे आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं। लगातार 11 दिनों से चल रहे आंदोलन के कारण प्रदेश के अनेक सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हो गई है, लेकिन सरकार अब भी मौन बनी हुई है।

इस दौरान आंदोलन स्थल पर पूर्व विधायक अरुण वोरा ने शिक्षकों को अपना समर्थन देते हुए कहा कि “मोदी की गारंटी अब केवल चुनावी जुमला साबित हुई है। सरकार को अपने वादे निभाने होंगे और अतिथि शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करना होगा।”

आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष राजकुमार पाली, राकेश यादव एवं प्रदेश सचिव (अ. जा.) सुधीर चंदेल ने भी शिक्षकों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से तत्काल नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और व्यापक जनसमर्थन दिया जाएगा।

आंदोलनकारी शिक्षकों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक नियमितीकरण पर ठोस एवं लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

“वादा किया है तो निभाना होगा, अतिथि शिक्षकों को उनका अधिकार दिलाना होगा… वरना गद्दी छोड़नी होगी!”

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