महिलाओं की महिमा ‘अपरंपार’, किसकी नैया होगी पार? – सारण में महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी, 9% अधिक मतदान से बदल सकते हैं नतीजे

संदीप सिंह, सारण। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में सारण जिले की महिलाओं ने लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी शक्ति और सजगता का अद्भुत प्रदर्शन किया है।
जिले के 10 विधानसभा क्षेत्रों में हुए मतदान में महिलाओं ने पुरुषों से लगभग 9 प्रतिशत ज्यादा वोट डालकर इतिहास रच दिया। यह सिर्फ मतदान नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में महिला सशक्तिकरण की नई पटकथा है।

सारण में रिकॉर्ड मतदान — महिलाओं ने दिखाया दम

सारण जिले में कुल 63.86% मतदान हुआ है,
जिसमें महिलाओं का वोट प्रतिशत 68.26% जबकि पुरुषों का 59.93% रहा।
यह अंतर बताता है कि अब महिलाएं सिर्फ घर की दीवारों तक सीमित नहीं,
बल्कि लोकतंत्र की दिशा तय करने वाली शक्ति बन चुकी हैं।

विधानसभा क्षेत्र मतदान प्रतिशत

छपरा 58.10% (सबसे कम)
सोनपुर 68.79% (सबसे अधिक)
परसा 64.25%
मारहौरा 65.10%
एकमा 63.45%
दरियापुर 62.90%
अमनौर 61.80%
रिविलगंज 64.00%
मकेर 63.72%
तरैया 62.45%

कुल औसत मतदान: 63.86%
महिलाओं का मतदान: 68.26%
पुरुषों का मतदान: 59.93%

“अब हम रसोई नहीं, सरकार तय करेंगे!” – महिला मतदाताओं का नया आत्मविश्वास

मतदान केंद्रों पर महिलाओं की भारी उपस्थिति से माहौल उत्सव जैसा दिखा।
गांव से लेकर शहर तक महिलाओं की लंबी कतारें सुबह से शाम तक लगी रहीं।
कई जगहों पर महिलाओं ने गर्व से कहा —

“अब हम रसोई नहीं, सरकार तय करेंगे!”

यह दृश्‍य बिहार की नई तस्वीर दिखाता है —
जहां महिलाएं सिर्फ ‘परिवार की रीढ़’ नहीं, बल्कि लोकतंत्र की दिशा बदलने वाली निर्णायक मतदाता बन चुकी हैं।

राजनीतिक समीकरण पर बड़ा असर

विश्लेषकों के अनुसार, यह 9% की महिला बढ़त सारण की 5–6 सीटों पर नतीजों को पूरी तरह पलट सकती है।
जहां पहले मुकाबला बराबरी का था, वहां अब महिला वोटिंग ने समीकरण उलट दिए हैं।
राजनीतिक दल भी अब इस “महिला फैक्टर” को लेकर अपनी रणनीति दोबारा गढ़ रहे हैं।

एनडीए के लिए महिला मतदाता उसकी “लाडली योजना” और “उज्ज्वला गैस” जैसी योजनाओं की परीक्षा हैं।

महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) महिलाओं के रोजगार, शिक्षा और महंगाई के मुद्दे पर भरोसा जता रहा है।

वहीं, तीसरा मोर्चा स्थानीय मुद्दों और महिला सुरक्षा के एजेंडे से जुड़कर अपने लिए जगह बना रहा है।

चुनावी विश्लेषण: कौन होगा फ़ायदे में?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महिलाओं का वोट भावनात्मक नहीं, व्यवहारिक होता है।
वे उस दल को प्राथमिकता देती हैं जिसने

घर की रसोई का खर्च आसान किया,

बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित की,

और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाए।

इस लिहाज़ से महिलाओं की यह वोटिंग लहर किसी भी गठबंधन के लिए “किंगमेकर” साबित हो सकती है।

अब सबकी नज़रें 14 नवंबर पर

अब सारण ही नहीं, पूरे बिहार की निगाहें 14 नवंबर पर टिकी हैं —
क्योंकि उसी दिन मतगणना होगी और यह तय होगा कि
महिलाओं की यह ऐतिहासिक भागीदारी किसकी नैया पार लगाती है।

“68% महिलाओं का वोट…
59% पुरुषों का वोट…
और अब इंतज़ार उस दिन का,
जब EVM बोलेगी — किसका हुआ उदय!”

रिपोर्टर – संदीप सिंह
खबर आलोक डिजिटल डेस्क, सारण
“महिलाओं की महिमा अपरंपार, अब 14 नवंबर को होगा असली फैसला!”

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