2 साल से बिना अध्यक्ष के चल रहे छत्तीसगढ़ के कई जिला सहकारी बैंक, चुनाव प्रक्रिया अब भी अधूरी

दुर्ग,मोरज देशमुख। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक (DCCB) पिछले दो वर्षों से अध्यक्षविहीन स्थिति में हैं। दुर्ग जिला सहकारी बैंक का मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहाँ नई संचालक मंडली का गठन तो हो चुका है, लेकिन अध्यक्ष पद का चयन अब तक नहीं हो पाया है।

प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार होने के बावजूद सहकारी बैंकों की चुनाव प्रक्रिया अधूरी है, जबकि अब धान खरीदी का सीजन शुरू होने वाला है और किसानों को भुगतान के लिए बैंक में स्थायी नेतृत्व की जरूरत है।

आमतौर पर DCCB के अध्यक्ष पद का चुनाव संचालक मंडल के सदस्यों द्वारा किया जाता है। यानी चुने हुए संचालक आपस में मतदान कर अध्यक्ष चुनते हैं। हालाँकि, कुछ परिस्थितियों में राज्य सरकार अध्यक्ष को मनोनीत (नॉमिनेट) भी कर सकती है — खासकर जब चुनाव प्रक्रिया विवादों, स्थगन या प्रशासनिक कारणों से अटक जाती है। वर्तमान में न केवल दुर्ग बल्कि राजनांदगांव, कवर्धा, बेमेतरा, बिलासपुर, रायगढ़ और अन्य जिलों में भी अध्यक्ष पद पर फैसला लंबित है।

सूत्रों के मुताबिक, राजनीतिक सहमति न बन पाने के कारण कई जिलों में अध्यक्ष पद का चुनाव पिछले दो वर्षों से टलता आ रहा है। परिणामस्वरूप, बैंक संचालन फिलहाल कार्यवाहक अधिकारियों के भरोसे चल रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अध्यक्ष पद रिक्त रहने से बैंक की नीतिगत निर्णय प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है। खासकर धान खरीदी जैसे अहम सीजन में, जब किसानों को भुगतान के लिए करोड़ों रुपये का लेन-देन होता है, तब नेतृत्व की कमी चुनौती बन सकती है।

गौरतलब है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक (DCCB) भारत में जिला स्तर पर संचालित होने वाले ग्रामीण सहकारी बैंक हैं, जो किसानों को ऋण, बीज, उर्वरक और अन्य वित्तीय सुविधाएँ प्रदान करते हैं। इन बैंकों को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत विनियमित किया जाता है।

फिलहाल, छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि जिला सहकारी बैंकों के अध्यक्षों का चुनाव या मनोनयन आखिर कब होगा — ताकि बैंक की नीतिगत और वित्तीय प्रक्रियाएँ फिर से पटरी पर आ सकें।

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