रायपुर: छत्तीसगढ़ एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (ATS) ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए भिलाई और रायपुर के दो नाबालिग किशोरों को हिरासत में लिया है। हाई-टेक सॉफ्टवेयर से हजारों इंस्टाग्राम ID की छानबीन, मानवीय खुफिया इनपुट और 48 घंटे की लगातार पूछताछ के बाद यह साफ हो गया कि दोनों किशोर पाकिस्तान-स्थित ISIS मॉड्यूल के ऑनलाइन हैंडलरों के सीधे संपर्क में थे।
जांच में सामने आया है कि पाकिस्तानी हैंडलरों ने इन नाबालिगों को “धार्मिक शिक्षा” के नाम पर कट्टरपंथी सामग्री भेजी, भारत-विरोधी विचारों से प्रभावित किया और ऑपरेशन “सिंदूर” से जुड़ी संवेदनशील जानकारियाँ जुटाने के लिए उकसाया।
सूत्रों के अनुसार, किशोरों से महत्वपूर्ण ठिकानों के नक्शे भेजने, त्योहारों के दौरान हिंसा भड़काने और देश के भीतर अस्थिरता फैलाने की भूमिका तैयार कराई जा रही थी।
पूछताछ में यह भी पता चला कि दोनों किशोर सोशल मीडिया ग्रुपों के माध्यम से अन्य नाबालिगों को भी जोड़कर उन्हें कट्टरपंथ की राह पर धकेलने की कोशिश कर रहे थे। पाकिस्तानी हैंडलरों द्वारा भेजे जा रहे हिंसक ऑनलाइन गेम, उग्र वीडियो और जिहादी सामग्री के जरिए उन्हें गैर-मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हिंसक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जा रहा था।
हैंडलरों की बातचीत में भविष्य के हमलों की प्लानिंग, हथियार उपलब्ध कराने और कश्मीर को इस्लामिक स्टेट बनाने जैसी खतरनाक बातें भी सामने आई हैं।
ATS ने दोनों किशोरों के मोबाइल, लैपटॉप, इंस्टाग्राम अकाउंट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए हैं। शुरुआती साक्ष्यों से साफ है कि दोनों किशोर पाकिस्तानी ISIS समर्थकों के प्रभाव में आकर भारत-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे।
ATS ने मामले की जांच को और गहरा करते हुए ऑनलाइन नेटवर्क, संभावित विदेशी लिंक और स्थानीय संपर्कों की पहचान करने का अभियान तेज़ कर दिया है।
आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस), थाना रायपुर द्वारा विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 के तहत अपराध क्रमांक 01/25 पंजीबद्ध किया गया।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के पाकिस्तान-आधारित मॉड्यूल द्वारा भारत में अस्थिरता फैलाने एवं आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित करने के उद्देश्य से साइबर स्पेस में सक्रिय फर्जी और छद्म पहचान वाले सोशल मीडिया अकाउंट संचालित किए जा रहे थे। इन हैंडलरों द्वारा इंस्टाग्राम आईडी के माध्यम से भारतीय युवाओं और किशोरों को बरगलाने, भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए उकसाने तथा उग्र हिंसा, कट्टरपंथीकरण और जिहादी विचारधारा का प्रसार किया जा रहा था।
उक्त मॉड्यूल से जुड़े पाकिस्तानी हैंडलरों ने नाबालिग भारतीय किशोरों को अपने इंस्टाग्राम ग्रुप चैट में जोड़कर उनका व्यवस्थित कट्टरपंथीकरण किया तथा उनके माध्यम से ISIS की विचारधारा और हिंसक भड़काऊ सामग्री के प्रसार का प्रयास किया। किशोरों को छत्तीसगढ़ में ISIS का मॉड्यूल खड़ा करने हेतु प्रेरित किए जाने के साक्ष्य भी सामने आए।
एटीएस और संबद्ध जांच एजेंसियों की सतर्कता तथा निरंतर साइबर निगरानी के फलस्वरूप ISIS-प्रभावित दो किशोरों की पहचान की गई। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उनके विरुद्ध विधि अनुसार आवश्यक कार्रवाई की गई है।
