भिलाई। आज छत्तीसगढ़ का पारंपरिक ‘अक्ति तिहार’ भिलाई नगर के रेलवे कॉलोनी क्षेत्र में बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ‘लकड़ी के पुतरा-पुतरी विवाह’ की अनूठी परंपरा को पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाया गया।
कार्यक्रम में कॉलोनी की महिलाएं पारंपरिक साड़ी और आभूषणों में सजी-धजी नजर आईं, वहीं बच्चों और युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजन स्थल को रंग-बिरंगे सजावट और पारंपरिक मंडप से सजाया गया, जहां विवाह की सभी रस्में पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न कराई गईं।
तस्वीरों में देखा जा सकता है कि छोटी-छोटी बच्चियां दुल्हन के रूप में सजी हुई हैं, जो अपने हाथों में लकड़ी के पुतरा-पुतरी को दूल्हा-दुल्हन के रूप में थामे हुए इस परंपरा को निभा रही हैं। एक बालिका लाल पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों में सजी हुई, पूरे आत्मविश्वास और खुशी के साथ इस सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनी नजर आई, जो इस परंपरा की जीवंतता को दर्शाता है।

वहीं एक अन्य दृश्य में महिलाएं पूजा-अर्चना और आरती करते हुए दिखाई दे रही हैं, जहां दीप प्रज्वलित कर पूरे विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न किया जा रहा है। मंगल गीतों और लोक परंपराओं की मधुर ध्वनि ने पूरे वातावरण को भक्ति और उल्लास से भर दिया।
इस आयोजन में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए और सभी ने मिल-जुलकर इस परंपरा को जीवित रखने का संकल्प लिया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं और इससे सामाजिक एकता व भाईचारा भी मजबूत होता है।
रेलवे कॉलोनी में आयोजित यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता का एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया।