दुर्ग। राजभाषा के अंतर्गत बैंक ऑफ बड़ौदा दुर्ग द्वारा केंद्रीय विद्यालय दुर्ग में अनुच्छेद लेखन प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया जिसमें सौ से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति अभिरुचि जागृत करना और लेखन कौशल को प्रोत्साहन देना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य उमाशंकर मिश्र ने की जबकि मुख्य आयोजन के रूप में बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय व्यवसाय विकास प्रबंधक विनय प्रकाश और अधिकारी सुदीपा राय विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
प्राचार्य उमाशंकर मिश्र ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि लेखन व्यक्ति के विचारों को दिशा देता है और आत्म-अभिव्यक्ति का सर्वोत्तम माध्यम है। शब्द वह शक्ति है जो व्यक्ति के व्यक्तित्व को आकार देती है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे लेखन को केवल परीक्षा की तैयारी का माध्यम न मानें बल्कि अपने विचारों और संवेदनाओं को शब्दों के रूप में गढ़ने की आदत विकसित करें।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ अजय आर्य ने कहा कि शब्द को ब्रह्म कहा गया है क्योंकि वह नष्ट नहीं होता और अपनी छाप हमेशा छोड़ जाता है। लेखन वह साधना है जो मनुष्य को अमरता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्नों पर वे ही लोग अमर हुए हैं जिन्होंने अपने विचारों को शब्दों के माध्यम से व्यक्त किया।
मुख्य अतिथि विनय प्रकाश ने कहा कि बैंक ऑफ बड़ौदा सदैव छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए तत्पर रहा है। उन्होंने बताया कि बैंक छात्रों को ब्याज मुक्त शिक्षा ऋण की सुविधा देता है तथा बच्चों के लिए खोले जाने वाले खातों में किसी प्रकार का न्यूनतम शेष रखने की बाध्यता नहीं रखी गई है। सुदीपा रॉय ने बताया कि इस प्रतियोगिता के विषय पर्यावरण मोबाइल की लत कृत्रिम बुद्धिमत्ता का महत्व और सुबह की सैर का आनंद जैसे समसामयिक विषयों पर आधारित थे जिनसे विद्यार्थियों को अपने विचारों की गहराई को व्यक्त करने का अवसर मिला।
निर्णायक गण के रूप में नीता दास, पुरुषोत्तम साहू, विनय प्रकाश और सुदीपा रॉय ने कार्य किया। प्रतियोगिता का संचालन नीता दास ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन पुरुषोत्तम साहू ने प्रस्तुत किया। सभी प्रतिभागियों को भेंट स्वरूप पेन प्रदान किया गया।
इन्हें मिला पुरस्कार
विजेताओं में प्रथम स्थान वासुदेव उमरे द्वितीय स्थान श्रीया पांडे तथा तृतीय स्थान सारांश नापित ने प्राप्त किया। सांत्वना पुरस्कार सोनाली मिश्रा और चंचल साहू को जबकि प्रोत्साहन पुरस्कार यशस्वी राजपूत को प्रदान किया गया।
यह आयोजन विद्यार्थियों के लेखन कौशल को नई दिशा देने वाला और भाषा के प्रति प्रेम जगाने वाला सिद्ध हुआ।