Tuesday, July 28, 2026

हमे किसी का डर नहीं,हमे कोई हटा नही सकता:कलेक्टर के निर्देश भी बेअसर, प्रशासन मस्त-जनता त्रस्त,मवेशियों का डेरा बीच सड़क पर, नंदियों का आतंक, और अंधेरी सड़कें

खैरागढ़. लावारिस मवेसीयो और नंदियो का आतंक ,हो रहे आए दिन दुर्घटना, शासन प्रशासन को कोई लेना देना नहीं।। जिले में सड़क पर मवेशियों की समस्या को लेकर कलेक्टर द्वारा लगातार निर्देश दिए जाने के बावजूद हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं।। जिला मुख्यालय खैरागढ़ में ही प्रशासनिक निर्देशों की जमीनी हकीकत सामने दिखाई दे रही है।। शहर के पिपरिया से लेकर अमलीपारा मुख्य मार्गों और सोने सरकार की सड़कों पर जगह-जगह मवेशियों का डेरा रहता है।। बारिश के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो गई है।। मच्छरों से बचने और सूखी जगह की तलाश में बड़ी संख्या में मवेशी सड़कों पर आकर बैठ रहे हैं, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा लगातार बढ़ रहा है।।

बारिश में सड़क बनी मवेशियों का ठिकाना
बारिश के कारण खुले स्थानों में कीचड़ और पानी भरने से मवेशियों को सूखी जगह नहीं मिल पा रही है।। ऐसे में वे सड़क किनारे और कई जगह सड़क के बीचोंबीच बैठ जाते हैं।।
रात में कम रोशनी के कारण वाहन चालकों को सड़क पर बैठे मवेशी दूर से दिखाई नहीं देते
वाहन चालकों को सड़क में अचानक सामने आने पर उन्हें बचाने के प्रयास में हादसे की आशंका बनी रहती है।। व्यस्त मार्गों पर यह स्थिति कभी भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।।

नंदियों की बढ़ती संख्या ने बढ़ाई परेशानी
शहर में नंदियों की संख्या बढ़ना भी एक अलग समस्या बन गया है।। नगर के प्रमुख चौक-चौराहों और बाजार क्षेत्रों में नंदी अक्सर आपस में भिड़ जाते हैं।। लड़ाई के दौरान आसपास मौजूद लोग चपेट में आकर घायल हो रहे हैं, वहीं सड़क किनारे खड़े दोपहिया और अन्य वाहनों को भी नुकसान पहुंच रहा है।। भीड़भाड़ वाले बाजारों में नंदियों की ऐसी लड़ाई से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।।
बाजार क्षेत्र में कई बार नंदी आपस में भिड़ जाते हैं, जिससे व्यापारियों और ग्राहकों के वाहन क्षतिग्रस्त होने की स्थिति बनती है।। व्यापारियों का कहना है कि प्रशासनिक बैठकों में कई बार इन अस्थायी सब्जी ठेलों को विस्थापित करने की बात कही जाती है, लेकिन बैठक खत्म होने के बाद कार्रवाई धरातल पर नजर नहीं आती।।

दावे और निर्देश बहुत, कार्रवाई जमीन पर नहीं
मवेशियों को सड़कों से हटाने और शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन और नगर पालिका स्तर पर समय-समय पर निर्देश और दावे किए जाते रहे हैं।। बावजूद इसके शहर की सड़कों पर मवेशियों की संख्या कम नहीं हो रही है।। कलेक्टर के लगातार निर्देशों के बाद भी यदि जिला मुख्यालय में ही स्थिति जस की तस है तो संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।।

स्ट्रीट लाइटों की कमजोर रोशनी ने बढ़ाया खतरा
मवेशियों की समस्या के साथ शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है।।नगर के प्रमुख मार्गों पर लगी स्ट्रीट लाइटों में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से रात के समय सड़कें अंधेरे में डूबी रहती हैं।। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला कार्यालय के बाहर तक घोर अंधेरा छाया रहता है।। ऐसे में शहर के दूसरे हिस्सों की प्रकाश व्यवस्था का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।।
अंधेरी सड़कों पर बैठे मवेशी वाहन चालकों को समय रहते दिखाई नहीं देते और अचानक सामने आने पर दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। खासकर बारिश के मौसम में सड़क पर मवेशी, कम रोशनी और फिसलन तीनों मिलकर राहगीरों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर रहे हैं।।

अधिकारियों का पक्ष जानने फोन किया, नहीं मिला जवाब
मवेशियों की समस्या, नंदियों की बढ़ती संख्या, उत्पन्न अव्यवस्था और शहर की खराब स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर जब संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा।। लगातार संपर्क करने के बावजूद अधिकारियों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब शहर की गंभीर समस्याओं को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाता है, तो वे अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए फोन तक उठाने से क्यों कतरा रहे हैं।। प्रशासनिक स्तर पर लगातार निर्देशों और बैठकों के बावजूद यदि समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं और जिम्मेदार अधिकारी पक्ष रखने के लिए भी उपलब्ध नहीं होते, तो शहरवासियों की शिकायतों का समाधान कैसे होगा, यह बड़ा सवाल है।।

शहरवासियों को कब मिलेगी राहत?
खैरागढ़ की सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा, नंदियों की बढ़ती संख्या, गोल बाजार में अस्थायी सब्जी ठेलों से पैदा हो रही अव्यवस्था, पार्किंग संकट और कमजोर स्ट्रीट लाइट व्यवस्था—ये सभी समस्याएं सीधे शहरवासियों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ी हैं। इसके बावजूद प्रशासन और नगर पालिका की ओर से प्रभावी और स्थायी समाधान दिखाई नहीं दे रहा है।।

शहरवासियों का कहना है कि केवल बैठकों और निर्देशों तक कार्रवाई सीमित
प्रशासन को सड़कों से मवेशियों को हटाने, नंदियों की समस्या का स्थायी समाधान करने, खराब स्ट्रीट लाइटों को तत्काल दुरुस्त करने की जरूरत है।। सवाल यही है कि आखिर कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे और खैरागढ़ की सड़कों को मवेशियों व अव्यवस्था से कब राहत मिलेगी?

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