Wednesday, March 4, 2026

निरस्त खसरे पर रजिस्ट्री, पटवारी छेदी लाल जांगड़े पर गंभीर आरोप..

00 अपर जिला न्यायाधीश के आदेश की अवहेलना, फर्जीवाड़े का मामला उजागर,


खैरागढ़ : नगर के वार्ड क्रमांक 09, इतवारी बाजार निवासी मनीष सोनी ने लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में प्रेस वार्ता लेकर राजस्व विभाग के पटवारी छेदी लाल जांगड़े पर गंभीर आरोप लगाते हुए, भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं के तहत अपराध दर्ज कराने की मांग की है।। मामला ग्राम सोनेसरार स्थित भूमि खसरा नंबर 182/6 से जुड़ा है, जिसे न्यायालय द्वारा वर्षों पूर्व निरस्त किया जा चुका है।। इसके बावजूद कथित रूप से उसी निरस्त खसरे के आधार पर रजिस्ट्री करा दी गई।।
न्यायालय ने 2015 में ही खसरा किया था निरस्त
आवेदक मनीष सोनी के अनुसार ग्राम सोनेसरार, पटवारी हल्का क्रमांक 30 की 1 एकड़ 20 डिसमिल भूमि से संबंधित खसरा नंबर 182/6 को अपर जिला न्यायाधीश न्यायालय द्वारा 22 दिसंबर 2015 को पारित आदेश में स्पष्ट रूप से निरस्त कर दिया गया था।। न्यायालय ने माना था,कि उक्त खसरा गलत एवं फर्जी तरीके से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था।
तहसील कार्यालय ने भी रिकॉर्ड किया था खारिज
इतना ही नहीं, इससे पहले ही 24 मार्च 2015 को तहसील कार्यालय द्वारा पुनरावलोकन के दौरान पुराने पटवारी रिकॉर्ड, पर्चा ऋण पुस्तिका और संबंधित प्रविष्टियों को खारिज कर दिया गया था।। बावजूद इसके, आरोप है,कि संबंधित पटवारी ने इन सभी आदेशों को नजरअंदाज किया।।
निरस्त रिकॉर्ड पर 2021 में कराई गई रजिस्ट्री
आरोप है कि पटवारी छेदीलाल जांगड़े ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए, निजी स्वार्थ एवं अवैध लाभ की नीयत से, 18 अगस्त 2021 को उसी निरस्त खसरे, निरस्त पर्चा और निरस्त नक्शे के आधार पर भूमि की रजिस्ट्री करा दी।।
आवेदक का कहना है कि यह मामला अब केवल राजस्व विवाद नहीं, बल्कि सीधा आपराधिक धोखाधड़ी (Fraud) का मामला बन चुका है।।
भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध की मांग
मनीष सोनी ने इस पूरे मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 198, 199, 318 एवं 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध करने की मांग की है।।उनका कहना है,कि न्यायालय के आदेश के ऊपर कोई भी राजस्व अधिकारी या कर्मचारी आदेश पारित करने का अधिकार नहीं रखता।।
7 दिन में आदेश प्रस्तुत करने की मांग
आवेदक ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित पटवारी से यह स्पष्ट कराया जाए कि यदि खसरा 182/6 के पक्ष में कोई उच्च न्यायालय का आदेश मौजूद है, तो उसकी प्रमाणित प्रति 7 दिनों के भीतर प्रस्तुत की जाए।। यदि ऐसा नहीं होता है, तो इसे रिकॉर्ड में हेराफेरी एवं धोखाधड़ी मानते हुए थाना खैरागढ़ में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए।।
प्रशासनिक चुप्पी पर भी सवाल
आवेदक का कहना है,कि वर्षों से स्पष्ट न्यायिक आदेश होने के बावजूद उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और निजी भूमि को फर्जी व्यक्तियों से बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।।उन्होंने प्रशासन से मांग की है,कि न्यायालयीन आदेशों का सम्मान करते हुए इस प्रकरण का शीघ्र समाधान किया जाए।।

ताज़ा ख़बरें

खबरें और भी हैं...

अतिरिक्त ख़बरें