निकुम। एक तरफ शासन-प्रशासन सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण को लेकर गंभीर है तो दूसरी तरफ जिम्मेदार शासन-प्रशासन स्वच्छ भारत मिशन के स्लोगन के नीचे गांव गांव ओ डी एफ होने का अपनी ढपली अपनी राग अलाप कर मुहिम को अंगूठा दिखा रहे हैं। ऐसा ही मामला विकास खंड दुर्ग क्षेत्र ग्राम पंचायत आमटी के आश्रित ग्राम मासाभाट का मामला है। यहां लगभग दो वर्ष पूर्व सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए तकरीबन साढ़े तीन लाख की राशि से गांव में स्वीकृत हुआ, लेकिन पूर्व कार्य काल में स्वच्छता को लेकर जिम्मेदार पंचायत के जनप्रतिनिधि और ठेकेदार की लापरवाही व जिम्मेदार अधिकारियों की सुरसा नीति के कारण लाखों रूपये का अधूरा शौचालय खंडहर में तब्दील होने के कगार पर है, कई सवालिया निशान उठता अधूरे शौचालय की एक किश्त भी जारी कर ठेकेदार को लाभ क्यों मिला जबकि ठेकेदार आमटी की भी राशि मिल गया है लेकिन अब भी यह सार्वजनिक शौचालय अधूरा पड़ा है। गांव के लोग अधूरे शौचालय को लेकर सवाल कर रहे हैं। वही स्वच्छ भारत मिशन दांत चिढ़ा रहा है।
दो वर्ष पूर्व शौचालय अधूरे शौचालय न तो में दरवाजे लगाए गए हैं और न पेटिंग का कार्य हुआ है। वाटर सप्लाई व्यवस्था भी दुरुस्त व ढलाई भी नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त भी कई कार्य अब भी शौचालय में अधूरे हैं। जब गांव के लोग अधूरे शौचालय को लेकर जिम्मेदारों से सवाल जवाब करते हैं तो उन्हें चुप करा दिया जाता है। ऐसे में गांव को स्वच्छ बनाने की मुहिम शौचालय के अधूरे रहने से सवालों के घेरे में है। लोगों का कहना है कि जब से शौचालय के मद में धन की निकासी हुई है, तब से दो ग्राम पंचायत सचिव बदल चुके हैं। उसके बाद भी विकास खंड के जिम्मेदार शौचालय निर्माण पूरा कराने में तत्पर नजर नहीं आ रहे हैं। वही पूर्व सरपंच ग्राम पंचायत आमटी




