अपार आईडी से जोड़ी गई आरटीई प्रतिपूर्ति पर निजी स्कूलों का विरोध, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग को सौंपा ज्ञापन

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत अध्ययनरत विद्यार्थियों की शुल्क प्रतिपूर्ति को अपार आईडी से जोड़ने के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र प्रेषित किया है। एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में यह आदेश न केवल व्यावहारिक कठिनाइयों से घिरा है, बल्कि आरटीई की मूल भावना के अनुरूप भी नहीं है।

17 फरवरी के आदेश पर आपत्ति
उल्लेखनीय है कि लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा 17 फरवरी को जारी आदेश में समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि आरटीई पोर्टल में पंजीकृत निजी विद्यालयों में अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों की अपार आईडी अनिवार्य रूप से बनाई जाए। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि शुल्क प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान अपार आईडी प्रविष्टि के उपरांत ही किया जाएगा।

इसी आदेश के संदर्भ में 23 फरवरी को एसोसिएशन ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि अपार आईडी का शत-प्रतिशत निर्माण अभी संभव नहीं हो पाया है। वर्तमान में लगभग 7 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी लंबित है, जिसके पीछे प्रमुख कारण अभिभावकों की उदासीनता बताई गई है।

अभिभावकों की सहमति सबसे बड़ी बाधा
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि अपार आईडी निर्माण की प्रक्रिया में अभिभावकों की सहमति अनिवार्य है। अनेक अभिभावक आधार संबंधी सहमति पत्र जमा नहीं कर रहे हैं, जिससे विद्यालयों के प्रयास अधूरे रह जाते हैं। स्कूल प्रबंधन केवल प्रक्रिया को सुगम बना सकता है, परंतु अभिभावकों को बाध्य नहीं कर सकता।
इसके अतिरिक्त कई मामलों में आधार कार्ड और विद्यालयीन अभिलेखों में नाम एवं जन्मतिथि के अंतर के कारण तकनीकी अड़चनें भी सामने आ रही हैं। ऐसे प्रकरणों की सूची समय-समय पर संबंधित नोडल अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध कराई जा रही है।

पूर्व से प्रवेशित विद्यार्थियों को छूट की मांग
एसोसिएशन ने मांग की है कि जो विद्यार्थी पहले से आरटीई पोर्टल में पंजीकृत होकर निजी विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, उन्हें इस नए प्रावधान से अलग रखा जाए। आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में होने वाले नए प्रवेशों पर यह नियम लागू किया जाना अधिक उपयुक्त होगा।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रतिपूर्ति राशि रोकना उन निजी विद्यालयों के लिए अनुचित है, जो आरटीई के नियमों का पालन करते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। एसोसिएशन ने पूर्व से प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अपार आईडी संबंधी अनिवार्यता में छूट देने की मांग की है।

आरटीई की भावना बनाम प्रशासनिक शर्त
निजी स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि आरटीई अधिनियम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को निर्बाध शिक्षा उपलब्ध कराना है। यदि प्रतिपूर्ति राशि को अपार आईडी से जोड़कर रोका जाता है, तो इसका सीधा असर विद्यालयों की वित्तीय व्यवस्था और विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ सकता है।

फिलहाल इस मुद्दे पर शिक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। अपार आईडी की अनिवार्यता और प्रतिपूर्ति भुगतान के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाएगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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