बिहार चुनाव में NDA का मेगा घोषणापत्र जारी — एक करोड़ नौकरी, लखपति दीदी, 7 एक्सप्रेसवे और कर्पूरी ठाकुर सम्मान निधि से बदलेगा बिहार का चेहरा

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रण में शुक्रवार को NDA (भारतीय जनता पार्टी, जदयू, हम और लोजपा) ने अपना “संकल्प पत्र 2025” जारी कर चुनावी हवा में गरमाहट भर दी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी और गठबंधन के अन्य शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में जारी इस मेनिफेस्टो को NDA ने “बिहार का विजन डॉक्युमेंट” बताया।

जेपी नड्डा ने कहा —

“यह सिर्फ घोषणापत्र नहीं, बिहार के सुनहरे भविष्य की गारंटी है। NDA ने जो कहा है, वो किया है, और अब जो कह रहे हैं, वो ज़मीन पर उतरेगा।”

NDA का “संकल्प पत्र 2025” – रोजगार, किसान और महिला शक्ति पर फोकस

1 करोड़ रोजगार

सरकारी और निजी दोनों सेक्टर में एक करोड़ से अधिक नौकरियों का सृजन — युवाओं के पलायन को रोकने और स्किल डेवलपमेंट को नई दिशा देने का वादा।
हर जिले में “इंडस्ट्रियल पार्क और स्किल यूनिवर्सिटी” स्थापित की जाएगी।

कर्पूरी ठाकुर सम्मान निधि

किसानों को हर महीने ₹3,000 की सहायता राशि और सालाना ₹9,000 की सम्मान निधि।
NDA का दावा — “किसानों की आर्थिक ताकत ही बिहार की रीढ़ है।”

महिला सशक्तिकरण – 1 करोड़ “लखपति दीदी”

महिलाओं के लिए विशेष आर्थिक सशक्तिकरण योजना, जिससे उन्हें आत्मनिर्भर बनाते हुए सालाना ₹1 लाख तक की आमदनी का अवसर दिया जाएगा।
नीतीश कुमार ने कहा —

“बिहार की शक्ति उसकी महिलाएं हैं, अब हर घर से एक लखपति दीदी निकलेगी।”

मुफ्त बिजली, इलाज और आवास

  • 125 यूनिट मुफ्त बिजली सभी गरीब परिवारों के लिए।
  • 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा।
  • 50 लाख पक्के मकान — हर गरीब परिवार को छत की गारंटी।
  • बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर का मेगा रोडमैप
  • 7 नए एक्सप्रेसवे: उत्तर बिहार से दक्षिण तक विकास की रफ्तार तेज होगी।
  • 4 मेट्रो शहर: पटना के साथ गया, भागलपुर और मुजफ्फरपुर में मेट्रो प्रोजेक्ट शुरू।
  • 4 अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे और हर जिले में मॉडर्न बस टर्मिनल।

शिक्षा और युवा सशक्तिकरण

हर जिले में टेक्निकल कॉलेज, स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और स्टार्टअप फंड की घोषणा।
NDA का वादा — “बिहार के युवा अब नौकरी ढूंढेंगे नहीं, नौकरी देंगे।

विपक्ष का पलटवार – “ये संकल्प नहीं, सॉरी पत्र है”

घोषणापत्र के कुछ घंटे बाद ही तेजस्वी यादव ने NDA पर जोरदार हमला बोला।
उन्होंने कहा —

“20 साल से सत्ता में रहकर भी ये लोग वादे दोहरा रहे हैं। बिहार को रिपोर्ट कार्ड चाहिए, न कि झूठा संकल्प पत्र।”

कांग्रेस और जन सुराज पार्टी ने भी NDA के वादों को “खोखले वादों की झड़ी” बताया।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा —

“बिहार के युवाओं को भरोसा चाहिए, इवेंट नहीं।”

जनता की राय – उम्मीद और सवाल दोनों

पटना के डाकबंगला चौक से लेकर पूर्णिया, सीवान और मुजफ्फरपुर तक लोगों में चर्चा जोरों पर है।
एक ओर युवा वर्ग में नौकरी के वादे को लेकर उत्साह दिख रहा है, तो दूसरी ओर कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं —

“हर चुनाव में रोजगार का वादा होता है, लेकिन नतीजा वही – दिल्ली की टिकट!”

किसान संघ के अध्यक्ष का बयान –

“अगर ₹3,000 की मासिक सहायता सच में मिले, तो गांव की अर्थव्यवस्था में क्रांति आएगी।”

राजनीतिक विश्लेषण

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि NDA का घोषणापत्र बड़ा और बहुआयामी है —
इसमें विकास, महिला सशक्तिकरण, रोजगार और किसान सभी वर्गों को साधने की कोशिश की गई है।
लेकिन चुनौती यह है कि इतने बड़े वादों का वित्तीय स्रोत और क्रियान्वयन कितना संभव होगा, यह आने वाला वक्त बताएगा।

नतीजा क्या होगा?

बिहार की सियासी जमीन पर अब मुकाबला “विकास बनाम विश्वास” का हो चुका है।
एक ओर NDA अपने संकल्प पत्र को “भविष्य का खाका” बता रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे “20 साल की असफलता की पुनरावृत्ति” करार दे रहा है।

जनता अब तैयार है यह तय करने के लिए कि
“वादों पर भरोसा करें या हकीकत के हिसाब मांगें?”

ख़बर आलोक | रिपोर्टर – संदीप सिंह | पटना से चुनावी स्पेशल रिपोर्ट
(“जहाँ खबर है असर के साथ — वही है खबर आलोक”)

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