जिला मुख्यालय खैरागढ़ की घटना:कलम और कैमरे पर खाकी का वार, पत्रकार को सरेआम पीटा, जिला पत्रकार संघ ने दिया धरना

00 जिला मुख्यालय के राजा फतेह सिंह खेल मैदान में चल रहे राज्योत्सव के कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को लाठी से पिटा सीएएफ के जवान ने,
00 बंसल न्यूज के संवाददाता किशोर सोनी की पिटाई का वीडियो वायरल, पत्रकारों के आक्रोश के बाद आरक्षक रजनीकांत उपाध्याय निलंबित, थाने और राजा फतेह सिंह खेल मैदान के सामने पत्रकारों का धरना, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल,

(यतेन्द्र जीत सिंह छोटू ब्यूरो चीफ जिला खैरागढ़)
खैरागढ़ :
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर खाकी के प्रहार ने खैरागढ़ में पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।। राज्योत्सव जैसे गरिमामय सरकारी आयोजन की कवरेज कर रहे बंसल न्यूज के संवाददाता एवं खैरागढ़ जिला पत्रकार संघ के सदस्य किशोर सोनी के साथ सीएएफ के जवान ने मारपीट की।। घटना का वीडियो सामने आने के बाद जिले के पत्रकारों में भारी आक्रोश फैल गया।। मामले की गंभीरता को देखते हुए 8वीं बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, राजनांदगांव के सेनानी ने आरक्षक क्रमांक 319 रजनीकांत उपाध्याय को निलंबित कर दिया है।।

कैमरे के सामने पत्रकार से मारपीट, वीडियो ने खोली पुलिस की कार्यप्रणाली की पोल
जिला मुख्यालय खैरागढ़ के राजा फतेह सिंह खेल मैदान में चल रहे राज्योत्सव कार्यक्रम के दौरान किशोर सोनी समाचार संकलन कर रहे थे।। इसी दौरान सीएएफ के जवान के साथ उनका विवाद हुआ और उनके साथ मारपीट की गई।। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मियों द्वारा पत्रकार के साथ हाथापाई और मारपीट किए जाने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं।। सार्वजनिक आयोजन के दौरान हुई इस घटना ने पुलिस के व्यवहार और पत्रकारों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।। सबसे बड़ा सवाल यह है कि समाचार संकलन कर रहे पत्रकार के साथ सीएएफ के जवान को मारपीट करने की नौबत क्यों आई? यदि पत्रकार के किसी आचरण पर पुलिस को आपत्ति थी तो क्या उसके लिए कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता उपलब्ध नहीं था? आखिर किस अधिकार से सीएएफ ने कानून की प्रक्रिया छोड़कर हाथ उठाए?

आधिकारिक आदेश जारी, आरक्षक रजनीकांत उपाध्याय निलंबित
मामले में 8वीं बटालियन, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, राजनांदगांव के कार्यालय से 2 नवंबर 2026 को निलंबन आदेश जारी किया गया है।। आदेश में पुलिस अधीक्षक, जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के पत्र क्रमांक पी.उ./केसीजी/रक्षितो/317/2026 दिनांक 02.11.2026 का हवाला दिया गया है. आदेश के अनुसार, राज्योत्सव के दौरान राजा फतेह सिंह खेल मैदान, खैरागढ़ में कानून व्यवस्था ड्यूटी के लिए तैनात आरक्षक क्रमांक 319 रजनीकांत उपाध्याय द्वारा जिला पत्रकार संघ के सदस्य एवं बंसल न्यूज के प्रतिनिधि किशोर कुमार सोनी के साथ अभद्रतापूर्ण व्यवहार एवं मारपीट किए जाने तथा पुलिस सेवा की सामान्य शर्तों का उल्लंघन करने के आधार पर उन्हें 2 नवंबर 2026 से निलंबित किया गया है।। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता आदि की पात्रता होगी।। उन्हें वाहिनी मुख्यालय, राजनांदगांव में संबद्ध किया गया है।। इस आदेश के सामने आने के बाद मामले में विभागीय स्तर पर कार्रवाई की शुरुआत हो चुकी है। हालांकि पत्रकारों की मांग है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले सभी जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।।

थाने एवं राज्य फतेह सिंह खेल मैदान के सामने पत्रकारों का मोर्चा, कार्रवाई की मांग
घटना के विरोध में जिला पत्रकार संघ के सदस्यों सहित जिले के अन्य पत्रकार थाने एवं राजा फतेह सिंह खेल मैदान के मेन गेट पर धरने पर बैठ गए।। पत्रकारों ने संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच, कठोर वैधानिक कार्रवाई और पीड़ित पत्रकार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग उठाई।।
पत्रकारों का कहना है कि समाचार संकलन करना उनका पेशेवर दायित्व है किसी खबर की कवरेज के दौरान पुलिस को कोई आपत्ति होती है तो उसका समाधान कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।।पत्रकार के साथ मारपीट किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।।

जब पत्रकार ही सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
यह घटना केवल एक पत्रकार के साथ मारपीट तक सीमित नहीं है।। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रेस की गरिमा से जुड़ा गंभीर सवाल है।। पत्रकार का काम सत्ता और व्यवस्था से सवाल पूछना, घटनाओं को सामने लाना और जनता तक सच्चाई पहुंचाना है।। यदि समाचार संकलन करने वाले पत्रकार ही पुलिस के हाथों सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक पुलिस से सुरक्षा और न्याय की उम्मीद कैसे करेगा।। पुलिस का दायित्व कानून व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है।।वर्दी की गरिमा उसके अनुशासन और कानून के प्रति जवाबदेही से तय होती है, न कि उसकी ताकत के प्रदर्शन से
अब पुलिस प्रशासन की परीक्षा, निलंबन के आगे क्या होगी कार्रवाई?
आरक्षक के निलंबन से विभागीय कार्रवाई की शुरुआत जरूर हुई है, लेकिन अब सवाल यह है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कब पूरी होगी? क्या मारपीट में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी? क्या पीड़ित पत्रकार को न्याय मिलेगा? क्या भविष्य में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाएगी. सवाल सीधा है क्या पत्रकार को कैमरा लेकर सच दिखाने की कीमत पुलिस की मार खाकर चुकानी पड़ेगी.कलम और कैमरे की स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है। इसे किसी भी सूरत में पुलिसिया दबाव और बल प्रयोग से कुचला नहीं जा सकता।।

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