हॉस्पिटल सेक्टर निवासियों के बेदखली मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

भिलाई। हॉस्पिटल सेक्टर में निवासरत लोगों को जारी नोटिस के संबंध में 8 नवम्बर को पेशी रखी गई थी। इस अवसर पर हॉस्पिटल सेक्टर के सैकड़ों निवासी बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।

पेशी के दौरान हाईकोर्ट के अधिवक्ता अमित कुमार एवं गीत कुमार ने सेक्टरवासियों की ओर से कानूनी पक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि हॉस्पिटल सेक्टर के सभी निवासियों को एक समान नोटिस जारी किया गया है, जो कि कानूनी दृष्टि से गलत है, क्योंकि यहाँ रहने वाले अधिकांश लोग पूर्व बीएसपी कर्मियों के परिजन, लीजधारी, अलॉटमेंटधारी या लाइसेंसी हैं। अतः प्रत्येक श्रेणी के लिए भिन्न-भिन्न कानूनी धाराओं के अंतर्गत नोटिस जारी किया जाना आवश्यक था, जो नहीं किया गया।

अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि बिना सुव्यवस्थित पुनर्वास एवं वैकल्पिक व्यवस्था किए हॉस्पिटल सेक्टर के निवासियों को हटाना अनुचित और अमानवीय होगा। उन्होंने संपदा न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि इस संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की जा चुकी है।

संपदा न्यायालय द्वारा अगली पेशी की तिथि 19 नवम्बर 2025 निर्धारित की गई है।

वहीं, मजदूरों के बीच यह भी चर्चा का विषय रहा कि सूत्रों एवं समाचार पत्रों के अनुसार सेक्टर-9 अस्पताल के निजीकरण की प्रक्रिया चल रही है, जो भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों और सेक्टर के सैकड़ों श्रमिक परिवारों के लिए गहरी चिंता का विषय है। निजीकरण की स्थिति में श्रमिकों की नौकरी और रिटायर्ड कर्मचारियों को दवाई के लिए भटकना पड जाएगा सबके उपर संकट मंडरा रहा है।

संघ एवं समिति ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे अस्पताल के निजीकरण और ठेकेदारी प्रथा — दोनों का दृढ़ता से विरोध करते हैं।

आज की पेशी में उपस्थित प्रमुख नागरिकों में —
अरुंणा, वर्षा दीप, सुधा, लक्ष्मी यादव, नारायण राव, संजना, भावना, निरा डेहरिया सिंदुरिया, सारदा मेश्राम, मैरी, कलादास डेहरिया, ब्रम्हा, मीना, मन्नु, पी.के. सहित सैकड़ों सेक्टरवासी शामिल रहे।

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