फोर्स फार गुड हीरोज रोमशंकर का अनूठा पर्यावरण प्रेम

27 सालों से संरक्षित कर रखे है साढ़े आठ लाख पेड़
अपने व परिवार के हर सदस्य के जन्मदिन व विभिन्न मांगलिक अवसरों पर करते हैं पौधरोपण

दुर्ग। केबीसी के प्रतिष्ठित मंच से सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के हाथों पर्यावरण संरक्षण के लिए फोर्स फार गुड हीरोज सम्मान से सम्मानित रोमशंकर यादव का पर्यावरण प्रेम अनूठा है वे 27 सालों से साढ़े आठ लाख पेड़ों को संरक्षित कर रखे हुए है उनके द्वारा अपने व परिवार के हर सदस्य के जन्मदिन व विभिन्न मांगलिक अवसरों पर हर वर्ष पौधरोपण किया जाता है इनमें कई आज पेड़ बन चुके हैं यही नहीं वे लोगों को जन्मदिन, शादी के सालगिरह, गृह प्रवेश आदि के मौके पर उपहार में पौधे ही भेंट करते है।

पेड़ लगाना एवं इसके संरक्षण, को सबसे बड़ी निःस्वार्थ पूजा मानने वाले रोमशंकर को पेड़ पौधे लगाने की रूचि बचपन से रही है इसके चलते इसे नुकसान पहुंचाने पर पीड़ा होती है यही पीड़ा का अनुभव भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा उनके ग्राम के पास मरौदा डेम के आसपास 18 करोड़ की लागत से लगाए 10 लाख पौधों के पेड़ बनने के बाद इसकी अंधाधुध कटाई से हुई जहां प्रतिदिन हजारों पेड़ ठूंठ में तब्दील हो रहे थे तब पहले शासन प्रशासन व बीएसपी के अधिकारियों का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराया मगर किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया धीरे धीरे लगभग 35 प्रतिशत पेड़ ठूंठ में तब्दील हो गए तब वर्ष 1996-97 में खुद आगे आकर लोगों को पेड़ों के महत्व को समझाते हुए इसे काटने से मना किया और खुद भी पौधरोपण करने लगे उनके इस कार्य से प्रभावित होकर और भी युवा साथी उनके साथ जुड़ने लगे जिन सबको जोड़कर हितवा संगवारी नामक संगठन तैयार किया लोगों को जागरूक करने आसपास गांवों में रैलियां निकाली पहले खुद एवं अपने परिवार के सदस्यों के जन्म दिन एवं गृह प्रवेश, शादी, जन्मोत्सव आदि के मौके पर पौधरोपण किया एवं लोगों को ऐसे अवसरों पर उपहार में पौधे भेंट करने की मुहिम शुरू की अपने 50 वें जन्मदिन पर 50 पौधे रोपित किया साथ ही पितृपक्ष में पितरों की स्मृति में एवं परिजनों की मृत्यु होने पर उनकी याद में पौधा रोपित करने का अभियान शुरू किया हर साल परिवार के सदस्यों के साथ रक्षा बंधन पर पेड़ों को राखी बांधकर इसकी रक्षा का संकल्प लेते है इससे लोगों में जागरूकता आई जिससे पेड़ों की कटाई पर रोक लगी इस प्रकार उनके व उनकी संस्था हितवा संगवारी के प्रयास से उन्होंने बीएसपी द्वारा रोपित शेष बचे साढ़े छः लाख पेड़ों को कटने से बचाया है वहीं बीज का छिड़काव व पौधरोपण कर इसकी देखरेख करने से लगभग 2 लाख नए पेड़ तैयार हुए है जिन्हें मिलाकर लगभग साढ़े आठ लाख पेड़ों को संरक्षित रखने में सफल हुए है 27 वर्ष पूर्व शुरू किया गया उनका यह अभियान आज भी जारी है अभी भी नियमित नर्सरी में जाकर पेड़ों की देखरेख एवं पौधरोपण करते है वहीं उनके मुहिम से प्रेरित होकर दुर्ग जिले सहित प्रदेश में अनेक लोग जन्मदिन पर पौधरोपण कर रहे है।

यही नहीं उन्होंने जल जंगल जमीन को लेकर वर्ष 2002 में मंडला डिंडोरी के जंगल में पदयात्रा कर इस पर लेखन कार्य किया वहीं वर्ष 2004 में खारून नदी के उद्‌गम पेटेचुआ से संगम स्थल सोमनाथ तक पैदल नदी तटपर लगभग ढाई सौ किलोमीटर की खारून जलयात्रा कर पेटेचुआ से सोमनाथ तक शीर्षक से पुस्तिका का लेखन किया इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण, जल जंगल जमीन, कृषि आदि पर अनेक लेख विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुए है इस तरह लेखन के माध्यम से भी पर्यावरण संरक्षण के लिए शासन प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराने के साथ ही लोगों को जागरूक करने का कार्य निरंतर जारी है समाज सेवा के उनके इस कार्य के लिए वर्ष 2004 में भारत सरकार खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय नेहरु युवा क्रेंद की ओर से उन्हें जिला युवा पुरस्कार से नवाजा गया वहीं छग शासन ने वर्ष 2019 में चंदूलाल चंद्राकर पत्रकारिता राज्य अलंकरण से सम्मानित किया गया वर्ष 2023 में पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए आऊट लुक पत्रिका द्वारा राज्य स्तर पर स्पीक आऊट रिमेनिंग छत्तीसगढ़ अवार्ड से सम्मानित किया गया इसके अलावा अनेक मंचों पर विभिन्न समाज व संगठनों द्वारा भी सम्मानित किए गए हैं

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