धान खरीदी पर सरकार की नीयत में खोट है – छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन

दुर्ग। धान खरीदी की धीमी गति और टोकन मिलने में कठिनाइयों से परेशान किसानों ने छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के बैनर तले आज दुर्ग में गांधी प्रतिमा के पास और धमधा में गंडई चौक में एकसाथ प्रदर्शन किया, थमधा में किसानों के प्रदर्शन का नेतृत्व अध्यक्ष आई के वर्मा और दुर्ग में संयोजक एड राजकुमार गुप्त ने किया।

दुर्ग में प्रदर्शनकारी किसानों को संबोधित करते हुए संयोजक एड राजकुमार गुप्त ने राज्य सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि धान खरीदी पर उनकी नीयत में खोट है, पहले धान उत्पादक किसानों को खाद के लिए जद्दोजहद करना पड़ा जानबूझकर समितियों में यूरिया और डीएपी समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया ताकि हतोत्साहित होकर किसान कम रकबे में धान की बोवाई करे, धान खरीदी शुरू हुए 10 दिन बीत गए हैं किन्तु आजतक धान खरीदी की गति सामान्य नहीं हुई है, समितियों के कर्मचारियों और कम्प्यूटर आपरेटरों की हड़ताल खत्म हुए भी एक सप्ताह हो गया है।

इसके बावजूद दक्ष कम्प्यूटर आपरेटरों को धान खरीदी में लगाने के बजाय मतदाता सूची पुनरीक्षण में उनकी ड्यूटी लगा दी गई है और जिनसे धान खरीदी का कार्य कराया जा रहा है वे अनुभवहीन हैं, पिछले सालों में धान खरीदी जितनी होती थी इस साल सिर्फ एक तिहाई खरीदी ही हो पाई है, एग्रीटेक पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य किया गया है, जिन किसानों का पंजीयन नहीं है सरकार उनके धान नहीं खरीदेगा, इस साल ड्रोन से गिरदावरी कराया गया है जिसमें खसरा और रकबा से संबंधित अनेक त्रुटियां है जिसमें सुधार करने के लिए किसान पटवारी तहसीलदार के चक्कर काट रहे हैं, सरकार ने प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी करने का वायदा किया था लेकिन अब कह रहे हैं कि अनावरी रिपोर्ट के अनुसार धान खरीदी करेंगे, पूरी क्षमता से न तो टोकन जारी किया जा रहा है और न ही खरीद की जा रही है।

प्रदर्शनकारी किसानों ने सरकार को आगाह किया है कि एक भी किसान को धान खरीदी से वंचित नहीं होना चाहिए, किसानों के प्रदर्शन में कल्याण सिंह ठाकुर, बाबूलाल साहू, रामकृष्ण यादव, बंशीलाल देवांगन, मनोज मिश्रा, मेघराज मढरिया, अशोक धीवर, पुकेश्वर साहू, देवशरण, हिरामन, सहज सोनवानी, भूषण साहू, डलेश्वर गायकवाड़, प्रकाश गुप्ता, धर्मेंद्र सिंहा, नंदकुमार देशमुख, उत्तम चंद्राकर, बद्री प्रसाद पारकर, परमानंद यादव और राजेंद्र साहू आदि शामिल रहे।

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