मीडिएशन 3.0 को प्रभावी बनाने जिला अधिवक्ता संघ से संवाद

“केस से पहले कन्वर्सेशन” – न्याय को तेज और रिश्तों को बचाने पर जोर

दुर्ग। हर विवाद का निपटारा अदालत के फैसले से ही हो यह जरूरी नहीं है। एक बातचीत और निष्पक्ष संवाद वर्षों की मुकदमेबाजी से बेहतर समाधान दे सकता है। इसी सोच के साथ दुर्ग में मीडिएशन 3.0 को और प्रभावी बनाने के लिए जिला अधिवक्ता संघ के साथ संवाद किया गया।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के. विनोद कुजूर ने अधिवक्ताओं के साथ बैठक कर मध्यस्थता को बढ़ावा देने और अधिकाधिक उपयुक्त मामलों का समाधान संवाद से कराने पर चर्चा की। बैठक में जिला अधिवक्ता संघ दुर्ग के अध्यक्ष, सचिव, अन्य पदाधिकारी और अधिवक्ता उपस्थित रहे।

विवाद में जीत-हार से ज्यादा समाधान जरूरी
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि हर विवाद में केवल यह न देखा जाए कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा, बल्कि यह भी देखा जाए कि दोनों पक्ष मिलकर ऐसा समाधान निकाल सकते हैं जिसमें किसी की अनावश्यक हार न हो।

के. विनोद कुजूर ने अधिवक्ताओं से अपील की कि वे ऐसे मामलों की पहचान करें जिनमें मध्यस्थता से पक्षकारों के बीच स्थायी और स्वीकार्य समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता केवल पक्षकार के प्रतिनिधि नहीं होते, बल्कि उन्हें पक्षकार को उपलब्ध सभी वैधानिक और प्रभावी समाधान विकल्पों से अवगत कराना भी उनकी जिम्मेदारी है।

मध्यस्थता समाधान की संस्कृति बने
मध्यस्थता केन्द्र प्रभारी दुर्ग अनिष दुबे ने अधिवक्ताओं को मध्यस्थता की व्यावहारिक प्रक्रिया और प्रभावी क्रियान्वयन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता का उद्देश्य किसी को हराना नहीं, बल्कि आपसी सहमति से विवाद खत्म करना है।

अनिष दुबे ने अधिवक्ताओं से अपने प्रकरणों में मध्यस्थता की संभावनाएं तलाशने और पक्षकारों को इसके लाभ समझाने की अपील की। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि मध्यस्थता को सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाधान की संस्कृति के रूप में विकसित किया जाए।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मानना है कि मीडिएशन 3.0 से न्याय प्रक्रिया तेज, सहज और रिश्तों को बचाने वाली बन सकेगी।

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