खबर आलोक टीम,बिहार। बिहार में लोकआस्था के सबसे बड़े पर्व छठ महापर्व का तीसरा दिन आज श्रद्धा और भव्यता से भरा रहा।
सांझ अर्घ्य से पहले ही घाटों पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी — हर दिशा में बस एक ही नारा गूंज रहा था,
“जय छठी मइया!”
गंगा, फल्गु, बुढ़ियाघाट, कंकरबाग, नेहरू घाट से लेकर छोटे-छोटे तालाबों तक —
हर जगह दीपों की रोशनी, लोकगीतों की गूंज और भक्तिभाव की अविरल धारा बह रही है।
ऐसा लग रहा है मानो पूरा बिहार आज सूर्यदेव के स्वागत में खड़ा हो गया हो।
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी
शाम ढलते ही श्रद्धालु परिवारों के साथ घाटों की ओर बढ़ने लगे।
महिलाएँ पारंपरिक साड़ी और सोलह श्रृंगार में, पुरुष धोती-कुर्ता और गमछा पहने, पूजा सामग्री से भरी सुपली और टोकरी लेकर घाटों की ओर जा रहे हैं।
हर घाट पर मिट्टी के दीयों की पंक्तियाँ, केले के पत्तों से बने तोरण द्वार, और गूंजते भक्ति गीतों ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया है।
बच्चे, युवा, बुजुर्ग — सबके चेहरे पर वही चमक, वही श्रद्धा, वही उम्मीद।
व्रती महिलाएँ जल में खड़ी होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी में हैं।
उनके साथ पूरा परिवार हाथ जोड़ सूर्यदेव से आशीर्वाद मांग रहा है —
“सूरज देव, सबका कल्याण करि दीं।”

दीपों की जगमगाहट और भीड़ का अनुशासन
बिहार के घाटों पर लाखों लोगों की भीड़ के बावजूद अनुशासन और शांति का अद्भुत उदाहरण देखने को मिल रहा है।
हर कोई एक-दूसरे की मदद कर रहा है — किसी ने घाट पर दीप जलाया, तो किसी ने अर्घ्य की थाली संभाली।
हर घाट पर सामूहिक भक्ति का दृश्य देखने योग्य है।
बिजली की रोशनी और दीयों की लौ मिलकर पूरे वातावरण को सुनहरी चमक दे रही है।
कहीं लोकगीतों की स्वर लहरियाँ हैं, तो कहीं ढोल-नगाड़ों की थाप।
प्रशासन और स्वयंसेवी संगठन मुस्तैद
भीड़ के इस विशाल जनसैलाब को देखते हुए प्रशासन ने अभूतपूर्व व्यवस्था की है।
स्थानीय पुलिस, एनडीआरएफ, नगर निगम और स्वयंसेवी संस्थाएँ मिलकर श्रद्धालुओं की सुविधा में लगी हैं।
घाटों पर गोताखोर, मेडिकल टीम और कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई है।
डीएम और एसपी स्तर के अधिकारी खुद घाटों का निरीक्षण कर रहे हैं।
कई जगहों पर CCTV कैमरे और माइक अनाउंसमेंट से भीड़ को दिशा दी जा रही है।
खबर आलोक टीम की मैदानी रिपोर्ट
खबर आलोक की टीम ने आज पटना, गया, दरभंगा, सीवान, मुजफ्फरपुर और भोजपुर जिलों के प्रमुख घाटों का दौरा किया।
टीम ने घाटों पर व्रती महिलाओं, श्रद्धालुओं और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की।
एक श्रद्धालु ने कहा —
“छठ बिहार का गर्व है। जब हम सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं, तो लगता है पूरा जीवन उजाले से भर गया।”
टीम ने घाटों की सजावट, पूजा की विधि और श्रद्धालुओं की भावनाओं को कैमरे में कैद किया है।
यह दृश्य सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि बिहार की संस्कृति और एकता का जीवंत प्रतीक है।
विदेशों में भी गूंज रहा है छठ का उत्सव
अमेरिका, दुबई, नेपाल, मॉरीशस और इंग्लैंड में बसे बिहारी समुदायों ने भी आज सांझ अर्घ्य की पूजा की।
स्थानीय झीलों और कृत्रिम तालाबों पर बनावटी घाट सजाए गए हैं, जहाँ प्रवासी परिवारों ने परंपरागत वेशभूषा में पूजा संपन्न की।
बिहार की यह आस्था अब वैश्विक पहचान बन चुकी है।
निष्कर्ष
छठ महापर्व के सांझ अर्घ्य ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बिहार की असली पहचान राजनीति या जाति से नहीं, आस्था और एकता से है।
आज का दृश्य केवल पूजा नहीं था — यह बिहार की आत्मा का उत्सव था।
सूर्यदेव की रोशनी में नहाया बिहार आज कह रहा है —
“हम बिहारी हैं, हमारी आस्था ही हमारी पहचान है।”
जय छठी मइया | जय बिहार | खबर आलोक टीम मैदान में